भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष को लेकर अब एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया है कि भारत के खिलाफ मई 2025 के संघर्ष के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। इतना ही नहीं, डार के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इसी समर्थन के लिए ईरान गए थे और वहां धन्यवाद भी दिया था।
लेकिन सवाल ये है—ईरान ने आखिर पाकिस्तान की किस तरह मदद की थी? क्या उसने सैन्य या खुफिया सहायता दी थी? या पाकिस्तान सिर्फ कूटनीतिक समर्थन को ‘Strong Support’ बता रहा है?
पूरी कहानी यहीं से शुरू होती है।
मई 2025 में क्या हुआ था?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की जान गई। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा।
7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच मिसाइल, ड्रोन और सैन्य हमले हुए और 10 मई को युद्धविराम की घोषणा हुई।
यानी ये सिर्फ बयानबाजी नहीं थी—दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच वास्तविक सैन्य टकराव हुआ था।
अब ईरान वाला एंगल
पाकिस्तान का नया दावा कहता है कि इस पूरे संकट के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को “strong support” दिया।
यही दावा अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
क्योंकि उस समय ईरान की सार्वजनिक भूमिका कुछ अलग दिखाई दे रही थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार तेहरान ने भारत और पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की थी।
इसलिए अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक, ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि ईरान ने पाकिस्तान को सीधे हथियार, सैनिक या सैन्य अभियान में सक्रिय भागीदारी दी थी।
फिर पाकिस्तान ‘Strong Support’ क्यों कह रहा है?
यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
संभव है कि पाकिस्तान जिस समर्थन की बात कर रहा है, उसमें कूटनीतिक संपर्क, राजनीतिक समर्थन, बातचीत और रणनीतिक सहयोग शामिल हो।
लेकिन इसे सीधे सैन्य मदद मान लेना जल्दबाजी होगी।
क्योंकि अगर ईरान ने वास्तव में पाकिस्तान को युद्ध के दौरान प्रत्यक्ष सैन्य सहायता दी थी, तो उसके सबूत इस दावे को कहीं ज्यादा गंभीर बना देंगे।
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान और भारत के संबंध भी लंबे समय से रणनीतिक रहे हैं।
चाबहार पोर्ट से लेकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक, भारत के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार रहा है।
ऐसे में अगर पाकिस्तान का दावा सही साबित होता है, तो दक्षिण एशिया की रणनीतिक तस्वीर को समझने के लिए भारत-पाकिस्तान-ईरान समीकरण पर नए सिरे से नजर डालनी पड़ेगी।
लेकिन अभी सबसे जरूरी बात है—
दावे और प्रमाण में फर्क करना।
पाकिस्तान ने समर्थन का दावा जरूर किया है, लेकिन ईरान की ओर से ऐसा स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि उसने मई 2025 के युद्ध में पाकिस्तान को प्रत्यक्ष सैन्य सहायता दी थी।
क्लोजिंग
तो क्या ईरान ने भारत के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान का साथ दिया था?
पाकिस्तान कह रहा है—हां, ईरान ने मजबूत समर्थन दिया था।
लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी है—
ये समर्थन सिर्फ कूटनीतिक था या इसके पीछे कोई सैन्य मदद भी थी?
जब तक इसके ठोस सबूत सामने नहीं आते, इस दावे को पाकिस्तान के बयान के रूप में ही देखना चाहिए, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।
और अगर भविष्य में इस दावे के पीछे कोई ठोस सबूत सामने आता है, तो भारत-पाकिस्तान संघर्ष की पूरी कहानी में ईरान का किरदार सबसे बड़ा नया ट्विस्ट बन सकता है।