चीन और अमेरिका जहां अपनी-अपनी टेक्नोलॉजी और ग्लोबल पावर को लेकर दुनिया में बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारत ने एक ऐसा कमाल कर दिया है जिसने डिजिटल दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है।
भारत की UPI अब सिर्फ भारत की पहचान नहीं रही, बल्कि 11 देशों तक पहुंच चुकी है। और जुलाई 2026 में UPI के जरिए हुए लेनदेन की कुल वैल्यू पहुंच गई ₹29.87 लाख करोड़।
मुख्य कहानी
सोचिए, जिस डिजिटल पेमेंट सिस्टम को करीब एक दशक पहले भारत में लॉन्च किया गया था, आज वही सिस्टम इंटरनेशनल लेवल पर अपनी जगह बना रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक UPI अब भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव में स्वीकार्यता या सीमा-पार भुगतान के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
यानी भारत ने सिर्फ डिजिटल पेमेंट की सुविधा नहीं बनाई, बल्कि एक ऐसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जिसे दूसरे देश भी अपना रहे हैं।
और सबसे बड़ा आंकड़ा देखिए—
जुलाई 2026 में UPI ने 2,365.8 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू ₹29.87 लाख करोड़ रही। इस नेटवर्क में 741 लाइव बैंक शामिल थे।
UPI की असली ताकत
UPI की खासियत सिर्फ इसकी स्पीड नहीं है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है—इंटरऑपरेबिलिटी।
यानी अलग-अलग बैंक और पेमेंट सिस्टम एक-दूसरे से जुड़कर तुरंत लेनदेन कर सकते हैं।
इसी वजह से भारत का UPI मॉडल अब दूसरे देशों के लिए भी दिलचस्प बन रहा है।
कंबोडिया में UPI की स्वीकार्यता के लिए NPCI International ने ACLEDA Bank के साथ साझेदारी की। वहीं ग्रीस में भारत-ग्रीस के बीच क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस की सुविधा शुरू हुई। मालदीव के साथ भी जुलाई 2026 में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट कनेक्टिविटी शुरू हुई।
दुनिया पर असर
अब इसका मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि विदेश में भारतीय UPI इस्तेमाल कर पाएंगे।
इसका मतलब यह भी है कि भारत अपनी Digital Public Infrastructure को ग्लोबल स्तर पर एक्सपोर्ट करने की क्षमता दिखा रहा है।
IMF के एक आंकड़े के मुताबिक 2024 में UPI का हिस्सा दुनिया के रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 49 प्रतिशत था।
यानी भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल अब सिर्फ घरेलू सुविधा नहीं, बल्कि वैश्विक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की कहानी का हिस्सा बन चुका है।
क्लोजिंग
तो चीन और अमेरिका की टेक्नोलॉजी रेस के बीच भारत ने एक अलग रास्ता चुना—
डिजिटल पेमेंट को इतना आसान बनाओ कि दुनिया उसे अपनाने लगे।
11 देशों में पहुंच और एक ही महीने में ₹29.87 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन का आंकड़ा बताता है कि UPI अब सिर्फ भारत का पेमेंट सिस्टम नहीं रह गया है।
यह भारत की उस डिजिटल ताकत की मिसाल है, जिसे दुनिया तेजी से पहचान रही है।
सवाल ये है—अगले 11 देश कौन होंगे?
भारत की UPI कहानी अभी खत्म नहीं हुई है…
असल में, अब इसकी ग्लोबल पारी शुरू हुई है।