Bengal Election 2026 | Jahangir Khan ने Falta से वापस लिया नामांकन.. उठने लगे गंभीर सवाल !पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय फाल्टा (Falta) विधानसभा सीट को लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान (Jahangir Khan) ने 21 मई को होने वाले री-पोल (दोबारा मतदान) से ठीक दो दिन पहले अपना नामांकन वापस ले लिया है। चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक कुछ घंटे पहले उठाए गए इस कदम ने पूरी राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है और कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 🧐 नामांकन वापसी के पीछे की 2 अलग कहानियां इस पूरे ड्रामे के पीछे दो बिल्कुल अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं: 1. जहांगीर खान का दावा: "विकास और शांति के लिए लिया फैसला" प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जहांगीर खान ने कहा कि वे फाल्टा के विकास के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा: "मैं फाल्टा की माटी का बेटा हूँ। मैं चाहता हूँ कि यहाँ शांति और सुरक्षा बनी रहे और इसका 'सोनार फाल्टा' बनने का सपना पूरा हो। राज्य के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की है, इसी वजह से मैं इस चुनाव से खुद को अलग कर रहा हूँ।" 2. TMC का रुख: "यह निजी फैसला है, दबाव के आगे घुटने टेके" जहांगीर के इस कदम से टीएमसी ने खुद को तुरंत अलग कर लिया। पार्टी ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी कर कहा: "जहांगीर खान का यह फैसला उनका निजी फैसला है, पार्टी का नहीं। जब से विधानसभा चुनाव के नतीजे (4 मई) आए हैं, अकेले फाल्टा में हमारे 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमारे दफ्तरों पर कब्जे किए जा रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों और प्रशासन के इस भारी दबाव के आगे कुछ लोग आखिरकार टूट गए और मैदान छोड़ दिया। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।" दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि जहांगीर खान मैदान छोड़कर भाग गए हैं क्योंकि उन्हें चुनाव के लिए पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहे थे। 🚨 क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल? (Key Questions & Context) जहांगीर खान की इस घोषणा ने चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं: री-पोल से ऐन पहले पीछे हटना: चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को फाल्टा के सभी 285 बूथों पर हुई वोटिंग को बड़े पैमाने पर धांधली, ईवीएम से छेड़छाड़ और वोटर्स को डराने की शिकायतों के बाद रद्द (Void) कर दिया था। जब पूरा राज्य इस री-पोल पर नजर टिकाए था, तब मुख्य विपक्षी उम्मीदवार का हट जाना चौंकाने वाला है। टीएमसी का गढ़ और अभिषेक बनर्जी का प्रभाव: फाल्टा सीट डायमंड हार्बर लोकसभा के अंतर्गत आती है, जो टीएमसी का सबसे मजबूत किला माना जाता है। यहाँ टीएमसी उम्मीदवार का बिना लड़े पीछे हट जाना पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। एजेंसियों और पुलिस का दबाव? चुनाव प्रचार के दौरान ही पुलिस ने जहांगीर खान के बेहद करीबी और टीएमसी के फाल्टा उप-प्रध्यक्ष सैदुल खान को गिरफ्तार किया था। सुवेंदु अधिकारी ने भी रैलियों में जहांगीर खान पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जिससे 'प्रशासनिक दबाव' के आरोपों को हवा मिल रही है। 🗳️ अब क्या होगा फाल्टा में? जहांगीर खान के हटने के बाद अब 21 मई को होने वाले मतदान में मुख्य मुकाबला इन प्रत्याशियों के बीच सिमट गया है: देवांगशू पांडा (BJP) अब्दुर रज्जाक मोल्ला (Congress) शंभू नाथ कुर्मी (CPI-M) इस पूरे घटनाक्रम के बाद 24 मई को आने वाले नतीजों पर पूरे बंगाल की नजरें टिकी हुई हैं।

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