Student Protest पर Supreme Court का बड़ा आदेश! छात्रों और अपराधियों पर अलग कार्रवाई | CJP Protest | 4S News
देशभर में छात्र प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी प्रदर्शन में शामिल हर छात्र को अपराधी मानना सही नहीं है। यदि किसी ने हिंसा या तोड़फोड़ नहीं की है, तो उसके साथ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान के तहत नागरिकों का अधिकार है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति हिंसा, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां और राज्य सरकारें कार्रवाई करते समय यह स्पष्ट अंतर करें कि कौन केवल प्रदर्शन में शामिल था और कौन वास्तव में हिंसक गतिविधियों में शामिल था। बिना पर्याप्त सबूत किसी छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रों का भविष्य और शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी छात्र के खिलाफ हिंसा या अन्य गंभीर अपराध का कोई ठोस सबूत नहीं है, तो केवल प्रदर्शन में मौजूद रहने के आधार पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस टिप्पणी का मतलब यह नहीं है कि हिंसा करने वालों को छूट दी जाएगी। जिन लोगों ने कानून तोड़ा है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है या हिंसा में भाग लिया है, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को छात्र आंदोलनों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का संदेश साफ है—शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए, ताकि निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो।