Scindia Royal Family Property Dispute: 55 साल बाद हुआ फैसला, किसे क्या मिला?
देश के सबसे चर्चित शाही परिवारों में से एक ग्वालियर के सिंधिया राजघराने का दशकों पुराना संपत्ति विवाद आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब 55 साल से चली आ रही विरासत की लड़ाई में समझौते का रास्ता सामने आया है। हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियों, महलों और ट्रस्टों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद अब सवाल यही है कि आखिर किसे क्या मिला? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक समझौते की पूरी कहानी।
सिंधिया राजघराने की संपत्ति को लेकर वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही थी। इस विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिवार की अन्य सदस्य—वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे सिंधिया और उषा राजे राणा—पक्षकार रहे। विवाद में ग्वालियर का जय विलास पैलेस, उषा किरण पैलेस, शिवपुरी का माधव पैलेस, दिल्ली, मुंबई और पुणे की कई संपत्तियां तथा कई ट्रस्ट शामिल रहे।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच एक विस्तृत समझौता तैयार किया गया है। प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार, जिस पक्ष के पास वर्तमान में जो संपत्ति है, वही उसके पास रहेगी। यानी मौजूदा कब्जे को ही मालिकाना अधिकार का आधार माना गया है। इस फॉर्मूले के तहत लंबे समय से चले आ रहे कई मुकदमों को समाप्त करने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि अदालत की अंतिम कानूनी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होना अभी बाकी बताई गई है।
बताया जा रहा है कि विवादित संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये तक आंकी जाती है। इसमें शाही महल, हेरिटेज होटल, कृषि भूमि और विभिन्न ट्रस्टों की संपत्तियां शामिल हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते से वर्षों से चली आ रही पारिवारिक और कानूनी लड़ाई का अंत होगा तथा भविष्य के विवादों की संभावना भी कम होगी।
हालांकि "किसे क्या मिला" इसका पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समझौते का आधार संपत्तियों का नया बंटवारा नहीं बल्कि मौजूदा कब्जे और प्रबंधन को स्वीकार करना है। यानी प्रत्येक पक्ष के पास जो संपत्ति पहले से है, वही उसके अधिकार में बनी रहने का प्रस्ताव है।
करीब पांच दशक से अधिक समय तक चले इस शाही संपत्ति विवाद का समाधान भारतीय न्यायिक इतिहास के महत्वपूर्ण मामलों में गिना जा रहा है। अब सबकी नजर अदालत की अंतिम कानूनी मंजूरी पर है, जिसके बाद सिंधिया राजघराने के इस लंबे अध्याय का औपचारिक समापन हो सकेगा