संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का BRICS देशों के साथ गैर-तेल (non-oil) व्यापार हाल ही में $312 बिलियन से अधिक दर्ज किया गया है।
1. $312 बिलियन का आंकड़ा और BRICS का दांव
जयपुर में आयोजित BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान UAE के विदेश व्यापार मंत्री डॉ.
ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब:
UAE अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स के केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। लोकल करेंसी ट्रेड:
BRICS देश लगातार डॉलर के अलावा अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (जैसे रुपये और दिरहम) में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा रहे हैं।
2. भारत-UAE 'नई सिल्क रोड' (IMEC)
G20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) भारत से यूरोप तक का एक बहु-मॉडल (समुद्री और रेल) व्यापार मार्ग है:
ईस्टर्न कॉरिडोर:
भारत के पश्चिमी बंदरगाहों (जैसे मुंबई/मुंद्रा) को UAE के जेबेल अली (Jebel Ali) बंदरगाह से जोड़ता है। नॉर्दर्न कॉरिडोर:
UAE और सऊदी अरब से होते हुए रेलवे लाइन के जरिए इजराइल के हाइफा बंदरगाह तक जाता है, जहां से यूरोप (ग्रीस, इटली, फ्रांस) के लिए समुद्री मार्ग जुड़ता है।
3. यूरोप और पश्चिमी देशों पर प्रभाव
| पहलू | प्रभाव व बदलाव |
| समय और लागत की बचत | पारंपरिक स्वेज नहर (Suez Canal) मार्ग की तुलना में व्यापार पारगमन समय में 40% तक की कमी और लागत में भारी बचत का अनुमान है। |
| सुचारू सप्लाई चेन | लाल सागर और स्वेज नहर जैसे भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील चोक-पॉइंट्स पर निर्भरता कम होगी। |
| ऊर्जा और डिजिटल हाईवे | इस मार्ग पर केवल माल ही नहीं, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन पाइपलाइन, बिजली ग्रिड और ऑप्टिकल फाइबर डिजिटल केबल भी बिछाए जाने की योजना है। |
| यूरोप की निर्भरता | यूरोप के प्रमुख बंदरगाह (जैसे इटली का ट्रिएस्ट और ग्रीस का पीरियस) एशियाई बाजारों और मध्य पूर्व के ऊर्जा स्रोतों से सीधे जुड़ जाएंगे। |