भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि हाई-टेक डिफेंस सिस्टम का एक्सपोर्टर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
ताजा खबर लेजर हथियार को लेकर है। भारत की सरकारी कंपनी BEL ने DRDO के स्वदेशी Laser Directed Energy Weapon यानी DEW को विदेशी बाजार में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है।
यानी जिस टेक्नोलॉजी को कभी सिर्फ अमेरिका, इजरायल और कुछ चुनिंदा देशों की ताकत माना जाता था, अब भारत भी उसे दुनिया के सामने एक्सपोर्ट प्रोडक्ट के तौर पर पेश कर रहा है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—इस लेजर हथियार में ऐसा क्या खास है?
लेजर हथियार की सबसे बड़ी ताकत है इसकी स्पीड और कम लागत वाला engagement। पारंपरिक मिसाइल की तरह हर बार महंगा ammunition इस्तेमाल करने के बजाय, लेजर सिस्टम बिजली और beam के जरिए target को engage करता है। इसी वजह से ड्रोन और छोटे aerial targets के खिलाफ Directed Energy Weapons को भविष्य की air defence technology माना जा रहा है।
भारत ने इस क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया है।
DRDO ने अप्रैल 2025 में अपने 30 किलोवाट class Mk-II(A) Laser-DEW का सफल प्रदर्शन किया था, जिसे drones और दूसरे aerial threats को neutralize करने के लिए विकसित किया गया है।
और अब भारत इससे आगे की क्षमता पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 किलोवाट DURGA-II और इससे भी ज्यादा power वाले laser systems पर development चल रहा है।
यही वजह है कि भारत के laser weapon को लेकर दुनिया की नजरें बढ़ रही हैं।
हालांकि यहां एक जरूरी बात है—“दुनिया का सबसे सस्ता laser weapon” होने का आधिकारिक प्रमाण अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इसे confirmed fact की तरह नहीं, बल्कि भारत की low-cost defence manufacturing capability से जुड़ी संभावित खासियत के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
अगर भारत इस technology को बड़े पैमाने पर कम लागत में produce और export करने में सफल होता है, तो इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो महंगे anti-drone और air-defence systems खरीदते हैं।
मतलब साफ है—
भारत की ताकत अब सिर्फ BrahMos, missiles और fighter jets तक सीमित नहीं है।
अब भारत Laser Weapons और Directed Energy Weapons जैसे futuristic हथियारों को भी global defence market में ले जाने की तैयारी कर रहा है।
और अगर ये technology बड़े पैमाने पर export होती है, तो आने वाले समय में “Made in India” सिर्फ हथियारों की पहचान नहीं, बल्कि high-tech defence technology की पहचान भी बन सकती है।