भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) भारत को अमेरिकी GPS (Global Positioning System) पर निर्भरता समाप्त करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम प्रदान करता है।
हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, ISRO अपने अगली पीढ़ी के NVS सीरीज उपग्रहों (NVS-03, NVS-04, NVS-05) को तेजी से लॉन्च करने की तैयारी में है ताकि NavIC के 7-सैटेलाइट बेस लेयर नेटवर्क को पूरी तरह मजबूत बनाया जा सके।
1. NavIC क्या है और GPS से कैसे अलग है?
NavIC (IRNSS) भारत का अपना क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन सिस्टम है।
कवरेज क्षेत्र:
यह पूरे भारत और भारतीय सीमाओं से 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र को उच्च सटीकता के साथ कवर करता है। फ्रीक्वेंसी बैंड:
GPS मुख्य रूप से L5/L1 सिंगल फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करता है, जबकि NavIC Dual-Frequency (L5 और S बैंड तथा नई NVS सीरीज में L1 बैंड) पर काम करता है। इससे घने शहरों या खराब मौसम में भी सिग्नल और लोकेशन की सटीकता अधिक रहती है। सटीकता (Accuracy):
आम नागरिकों के लिए NavIC की सटीकता 5 से 10 मीटर तक है, जबकि रक्षा और रणनीतिक उपयोग के लिए यह इससे भी अधिक सटीक एन्क्रिप्टेड सेवा (Restricted Service) प्रदान करता है।
2. 'GPS की गुलामी' खत्म करना क्यों जरूरी था?
कारगिल युद्ध का सबक: 1999 के कारगिल युद्ध के समय जब भारत को पाकिस्तानी घुसपैठियों की लोकेशन के लिए GPS डेटा की जरूरत थी, तब अमेरिकी प्रशासन ने भारत को GPS एक्सेस देने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद ही भारत ने अपने आत्मनिर्भर नेविगेशन सिस्टम (NavIC) की नींव रखी। सैन्य और रणनीतिक स्वायत्तता:
युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव की स्थिति में विदेशी नेविगेशन सिस्टम कभी भी बंद या ब्लॉक किए जा सकते हैं। NavIC होने से भारत की मिसाइलें, ड्रोन, फाइटर जेट्स और रक्षा बल पूरी तरह स्वतंत्र रहते हैं।
3. NVS सीरीज और स्मार्टफोन इंटीग्रेशन
ISRO अब दूसरी पीढ़ी के NVS (Next-Generation Navigation Satellites) लॉन्च कर रहा है।
| पहलू | विवरण |
| L1 सिग्नल सपोर्ट | NVS उपग्रहों में आम सिविलियन मोबाइल डिवाइसेज के लिए L1 फ्रीक्वेंसी शामिल की गई है, जिससे साधारण स्मार्टफोन में भी NavIC आसानी से काम करेगा। |
| स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक | इसमें भारत निर्मित सटीक रुबीडियम एटॉमिक क्लॉक (Atomic Clocks) का इस्तेमाल किया जा रहा है। |
| स्मार्टफोन में अनिवार्यता | Qualcomm, MediaTek और Apple (iPhone 15 व नए मॉडल्स) जैसे चिपसेट और फोन निर्माताओं ने NavIC सपोर्ट देना शुरू कर दिया है। भारत सरकार भी घरेलू बाजार के मोबाइल फोनों में NavIC सपोर्ट अनिवार्य करने पर काम कर रही है। |