Wednesday, August 19, 2026

भारत ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। करीब ₹155 करोड़ के ऑर्डर के साथ भारत अब ऐसा मोबाइल एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात करने जा रहा है, जो खुद चलते हुए भी दुश्मन या संदिग्ध ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक, पहचान और काउंटर कर सकता है।

भारत ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। करीब ₹155 करोड़ के ऑर्डर के साथ भारत अब ऐसा मोबाइल एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात करने जा रहा है, जो खुद चलते हुए भी दुश्मन या संदिग्ध ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक, पहचान और काउंटर कर सकता है।

इस सिस्टम का नाम है Indrajaal Ranger, जिसे Indrajaal Autonomous Defence Systems और Sigma Advanced Systems ने मिलकर तैयार किया है। खास बात ये है कि यह कोई एक जगह पर खड़ा रहने वाला डिफेंस सिस्टम नहीं है, बल्कि इसे वाहन पर लगाया गया है, यानी खतरा जहां जाएगा, सुरक्षा भी वहां पहुंच सकती है।

इसकी तैनाती खास तौर पर सीमा क्षेत्रों, संवेदनशील शहरी इलाकों और VVIP सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में की जा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब ₹145 करोड़ का ऑर्डर बॉर्डर सिक्योरिटी और करीब ₹10 करोड़ का ऑर्डर अर्बन पुलिसिंग के लिए है।

अब सवाल है कि ये सिस्टम करेगा क्या?

Indrajaal के मुताबिक इसकी तकनीक में AI, रडार, जामिंग, स्पूफिंग और दिशा पहचानने वाली तकनीक जैसे कई लेयर्स शामिल हैं। यानी सिस्टम का मकसद सिर्फ ड्रोन को देखना नहीं, बल्कि उसे ट्रैक करके उसकी गतिविधि को रोकना है।

आज के समय में छोटे ड्रोन सिर्फ निगरानी के लिए नहीं, बल्कि हथियार, नशीले पदार्थ और दूसरी अवैध चीजें सीमा पार पहुंचाने के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में मोबाइल एंटी-ड्रोन सिस्टम सीमा सुरक्षा के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

सबसे बड़ी बात ये है कि भारत की ड्रोन डिफेंस रणनीति अब सिर्फ एयरबेस या सैन्य ठिकानों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। बॉर्डर से लेकर शहरों तक, चलते-फिरते ड्रोन को पकड़ने और निष्क्रिय करने की क्षमता विकसित की जा रही है।

यानी आने वाले समय में आसमान से आने वाला छोटा सा ड्रोन भी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की नजर से बचना आसान नहीं होगा।