साइंस ने कर दिखाया, मच्छर होंगे खत्म, बहुत जल्द! | World Mosquito Program
[VO - तेज आवाज में]
सोचो अगर मैं कहूँ कि आने वाले कुछ सालों में आपको मच्छर काटेंगे तो, लेकिन आपको डेंगू, ज़ीका, चिकनगुनिया कभी होगा ही नहीं?
ना Odomos, ना कछुआ छाप, ना धुआँ!
ये कोई साइंस फिक्शन नहीं है। ये हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुआ एक प्रोग्राम आज 14 देशों में लाखों लोगों की जान बचा रहा है और इसका नाम है - World Mosquito Program.
[PART 2: PROBLEM - 0:31 to 1:30]
देखो, प्रॉब्लम मच्छर नहीं है, प्रॉब्लम है - Aedes aegypti.
वो ही काले-सफेद धारी वाला मच्छर जो दिन में काटता है। WHO के मुताबिक हर साल 40 करोड़ लोग डेंगू से इंफेक्ट होते हैं।
हमने क्या किया? कीटनाशक छिड़का, Fogging की। मच्छर ने खुद को और ज्यादा ताकतवर बना लिया। Resistance Develop कर लिया।
तो साइंटिस्ट्स ने सोचा, क्यों ना गेम का रूल ही बदल दिया जाए? मच्छर को मारना नहीं, मच्छर को ही बेकार कर देना।
[PART 3: SOLUTION - WOLBACHIA क्या है? - 1:31 to 3:30]
यहीं पर एंट्री होती है एक सुपरहीरो बैक्टीरिया की - Wolbachia.
ये बैक्टीरिया नेचर में पहले से ही मौजूद है। 50% कीड़ों में ये नेचुरली पाया जाता है, पर कमाल की बात - डेंगू फैलाने वाले Aedes aegypti में ये होता ही नहीं है।
World Mosquito Program के साइंटिस्ट्स ने क्या किया - उन्होंने लैब में Aedes aegypti मच्छरों में Wolbachia डाल दिया।
अब ये Wolbachia वाले मच्छर दो कमाल के काम करते हैं:
1. वायरस ब्लॉकर: Wolbachia मच्छर के अंदर ही वायरस से लड़ता है। ये वायरस को कॉपी होने से रोकता है। मतलब मच्छर के अंदर डेंगू, ज़ीका का वायरस develop ही नहीं हो पाता। वो काटेगा, पर बीमारी ट्रांसफर नहीं करेगा।
2. Self-Spreading Factory: ये सबसे खतरनाक ट्रिक है। जब Wolbachia वाला नर मच्छर, जंगली मादा से मिलता है, तो अंडे hatch ही नहीं होते। और जब Wolbachia वाली मादा, किसी भी नर से मिलती है, तो उसके सारे बच्चे Wolbachia वाले पैदा होते हैं।
मतलब धीरे-धीरे पूरी की पूरी मच्छर आबादी ही Wolbachia वाली बन जाती है।
[PART 4: METHOD - Replacement vs Suppression - 3:31 to 5:00]
यहाँ दो तरीके हैं, समझना जरूरी है।
एक है Suppression Method - जैसे Google की कंपनी Verily कर रही है, लाखों बांझ नर मच्छर छोड़ो, आबादी कम हो जाएगी। पर ये temporary है।
और दूसरा है WMP का Replacement Method - आबादी को खत्म नहीं करना, आबादी को Replace करना। खतरनाक मच्छरों को, बिना-बीमारी वाले मच्छरों से बदल देना।
और ये Method GMO नहीं है! इसमें कोई Genetic Modification नहीं है। ये बिल्कुल safe, self-sustaining और eco-friendly है।
Process सिंपल है:
Step 1: Community को समझाओ
Step 2: लैब में Wolbachia मच्छर breed करो
Step 3: शहर में थोड़े-थोड़े करके छोड़ दो
बस, कुछ हफ्तों में, baby mosquitoes भी Wolbachia वाले पैदा होने लगते हैं।
[PART 5: PROOF - क्या सच में काम किया? - 5:01 to 6:30]
ये थ्योरी नहीं, प्रूव्ड है बॉस!
इंडोनेशिया के Yogyakarta में: जहां Wolbachia मच्छर छोड़े गए, वहां डेंगू के cases 77% तक गिर गए और हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीज 86% कम!
ब्राज़ील में: Rio de Janeiro में Bio-Factory लगाई गई है जो साल के 10 करोड़ Wolbachia मच्छर बना रही है।
ऑस्ट्रेलिया में: Townsville शहर, जहां 2011 में पहली बार release हुआ था, आज वहां से डेंगू लगभग गायब है।
अभी तक ये प्रोग्राम ब्राज़ील, इंडोनेशिया, वियतनाम, कोलंबिया, मैक्सिको समेत 14 देशों में चल रहा है।
[PART 6: भारत में कब आएगा? - OUTRO - 6:31 to 8:00]
अब सवाल - भारत में कब?
अच्छी खबर ये है कि भारत में भी इस पर रिसर्च चल रही है। ICMR और कई लैब्स Wolbachia पर काम कर रही हैं। क्योंकि हमारा Aedes का स्ट्रेन थोड़ा अलग है, इसलिए हमें अपना खुद का Wolbachia Line बनाना पड़ेगा।
पर चुनौती भी बड़ी है - 140 करोड़ की आबादी, घनी बस्तियां और परमिशन।
पर सोचो, अगर ये हो गया, तो हर साल डेंगू से जो हजारों बच्चे हॉस्पिटल जाते हैं, वो रुक जाएगा। बिना किसी केमिकल के, बिना नेचर को नुकसान पहुंचाए।
ये है असली साइंस - मारो मत, सुधारो।
[END CARD - CTA]
आपको क्या लगता है - क्या हमें भारत में भी Wolbachia मच्छरों को छोड़ देना चाहिए? या ये नेचर के साथ खिलवाड़ है?
कमेंट में बताओ। और अगर Science Explained की ऐसी ही वीडियोज चाहिए, तो Subscribe ठोक दो।