"नमस्कार, और आप देख रहे हैं दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक जंग की यह विशेष रिपोर्ट।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के शतरंज पर चीन ने एक ऐसी 'सीक्रेट चाल' चली है, जिसने वॉशिंगटन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
: बैकग्राउंड व विजुअल्स - वॉशिंगटन vs बीजिंग, ट्रेड ग्राफिक्स]
"ग्लोबल ट्रेड वॉर में अब तक अमेरिका की तरफ से चीन पर टैरिफ और पाबंदियां लगाने की खबरें आती थीं। लेकिन इस बार बाजी पलटती दिख रही है।
अर्थशास्त्रियों और वैश्विक व्यापार रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने पिछले कुछ समय में अमेरिका के निर्यात (Exports), ऊर्जा बाजार (LNG) और डॉलर पर निर्भरता को कम करने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है।"
$90 Billion Trade Hit:
अमेरिका के कृषि, एनर्जी और टेक एक्सपोर्ट में चीन के जवाबी कदम। De-Dollarization & BRICS Pay: अमेरिकी डॉलर को दरकिनार कर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की बढ़त।
Supply Chain Diversification: चीन द्वारा अमेरिकी कृषि और गैस प्रोडक्ट्स के बजाय अन्य देशों से इंपोर्ट बढ़ाना।
: मुख्य बिंदु - चीन के तीन प्रमुख दांव]
"चीन ने अमेरिका को आर्थिक नुकसान पहुँचाने के लिए तीन बड़े मोर्चों पर काम किया है:
पहला दांव - अमेरिकी निर्यात पर रोक: चीन ने अमेरिका से आने वाली गैस (LNG) और कृषि उत्पादों (जैसे सोयाबीन और मक्का) के आयात में कटौती करके अपने ऑर्डर दूसरे देशों में ट्रांसफर कर दिए हैं। इससे अमेरिकी निर्यातकों को लगभग 90 अरब डॉलर के संभावित राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा है।
दूसरा दांव - डॉलर का बहिष्कार (De-Dollarization): ब्रिक्स (BRICS) देशों के साथ मिलकर चीन अपनी करेंसी 'युआन' और लोकल पेमेंट्स को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अमेरिकी डॉलर की वैश्विक बादशाहत पर असर पड़ रहा है।
तीसरा दांव - 'द 90% मॉडल':
चीन ने कई महत्वपूर्ण उद्योगों और सप्लाई चेन पर अपना ऐसा वर्चस्व बना लिया है, जहाँ अमेरिकी कंपनियाँ चाहकर भी चीन का मुकाबला नहीं कर पा रही हैं।"
"सुपरपावर बनने की इस होड़ में चीन का यह आर्थिक दांव अमेरिका के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल है। सवाल यह उठता है कि क्या वॉशिंगटन इस $90 बिलियन के झटके से उबरने के लिए कोई नया टैरिफ वॉर शुरू करेगा या फिर कूटनीतिक समझौते की राह चुनेगा?
इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है?
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