नेपाल से भारतीयों को बचा लाई सरकार, ज़िंदा लौटे लोग रोते हुए PM को धन्यवाद कहने लगे
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी है।
चारों तरफ पानी, मलबा और तबाही का मंजर है। कई इलाकों में सड़कें और संपर्क मार्ग टूट गए हैं और बड़ी संख्या में लोग अब भी अपने परिवारों से बिछड़े हुए हैं।
लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भारत सरकार ने नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
और अब सामने आई तस्वीरें उन परिवारों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं हैं।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को धीरे-धीरे सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया जा रहा है। भारत सरकार के मुताबिक अब तक 108 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि करीब 50 ऐसे भारतीयों से दोबारा संपर्क स्थापित हुआ है, जिनसे पहले संपर्क नहीं हो पा रहा था।
सोचिए...
जिस परिवार को कई घंटों तक अपने बेटे, भाई या पिता की कोई खबर नहीं मिल रही थी, अचानक जब फोन की घंटी बजती है और सामने से आवाज आती है—
“मैं सुरक्षित हूं...”
तो उस परिवार पर क्या गुजरती होगी?
यही वजह है कि नेपाल से वापस लौट रहे कई भारतीयों की आंखों में आंसू दिखाई दे रहे हैं।
किसी के लिए ये सिर्फ रेस्क्यू नहीं है।
ये अपने परिवार के पास दोबारा लौटने की खुशी है।
भारत सरकार ने नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाकर भारतीय नागरिकों की लोकेशन ट्रैक करने और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की।
विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों की मदद के लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया था। इसके जरिए नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाई गई और उनके परिवारों के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर भारत की तरफ से हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया था।
और भारत की मदद सिर्फ अपने नागरिकों तक सीमित नहीं रही।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए भारत ने राहत सामग्री भी भेजी। भारतीय विशेषज्ञों और टीमों ने भी नेपाल पहुंचकर मदद की है।
यानी एक तरफ भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल रहा है...
और दूसरी तरफ पड़ोसी देश नेपाल के लोगों के लिए भी मदद का हाथ बढ़ा रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी भारत की समय पर मिली सहायता के लिए आभार जताया है।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे भावुक हिस्सा है—अपने देश लौटते भारतीय।
किसी की आंखों में खुशी के आंसू हैं...
कोई अपने परिवार को फोन करके कह रहा है कि अब वह सुरक्षित है...
और कोई भारत सरकार का शुक्रिया अदा कर रहा है कि संकट की घड़ी में सरकार ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा।
सीधी बात ये है—
विदेश की जमीन पर जब कोई भारतीय मुसीबत में फंसता है, तब उसके परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि सरकार उसके साथ खड़ी हो।
नेपाल की इस आपदा में रेस्क्यू किए गए भारतीयों की कहानी इसी भरोसे को दिखाती है।
आज ये लोग अपने घर लौट रहे हैं।
लेकिन उनके पीछे नेपाल में तबाही से जूझ रहे हजारों परिवार हैं।
इसलिए राहत और बचाव का काम अभी खत्म नहीं हुआ है।
नेपाल को अभी भी मदद की जरूरत है।
और भारत की तरफ से राहत और बचाव का अभियान लगातार जारी है।
एक देश अपने नागरिकों को बचाने के लिए आगे आया...
और पड़ोसी देश के लोगों के लिए भी मदद का हाथ बढ़ाया।
यही है संकट की घड़ी में इंसानियत।
और यही है भारत-नेपाल रिश्ते की असली ताकत।
आपको क्या लगता है—मुसीबत के समय विदेश में फंसे भारतीयों को बचाने में भारत सरकार का ये अभियान कितना महत्वपूर्ण है?
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