Monday, October 5, 2026

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को खत्म कराने की कोशिशों के बीच भारत ने अब एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को खत्म कराने की कोशिशों के बीच भारत ने अब एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है।

यूक्रेन ने भारत के शांति प्रस्ताव को चार अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा के मुताबिक, भारत ने पहली बार इस संघर्ष को खत्म कराने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा दिखाई है।

यानी जिस युद्ध ने यूरोप को सालों से परेशान कर रखा है, उसमें अब भारत सिर्फ शांति की अपील करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहा है।

और भारत के प्रस्ताव की खास बात क्या है?

यूक्रेन के अनुसार, प्रस्ताव में केवल युद्धविराम की बात नहीं है। इसमें ऊर्जा ढांचे, बंदरगाहों और ब्लैक सी में सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी शामिल करने की कोशिश की गई है। यूक्रेन ने संकेत दिया है कि वह ऊर्जा और ब्लैक सी से जुड़े ट्रूस पर विचार करने के लिए तैयार है।

ब्लैक सी इस पूरे विवाद में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए यूक्रेन का अनाज और अन्य सामान अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। इसलिए अगर समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, तो इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन पर नहीं बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

भारत की पहल को लेकर रूस की तरफ से भी सकारात्मक संकेत आए हैं।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा कि मोदी के पास संघर्ष के समाधान को लेकर बहुत अच्छे विचार हैं और वह लगातार युद्ध खत्म करने का मुद्दा उठाते रहे हैं।

वहीं भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी साफ किया है कि भारत रूस और यूक्रेन—दोनों से बातचीत कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्लैक सी में शिपिंग की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात तथा संभावित गैर-हमला व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

अब सवाल ये है कि क्या भारत की पहल सच में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी?

फिलहाल इतना जरूर है कि यूक्रेन ने भारत के प्रस्ताव को चार प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। हालांकि इसे अंतिम शांति समझौता मानना अभी जल्दबाजी होगी। रूस और यूक्रेन के बीच कई बड़े मुद्दों पर मतभेद अभी भी मौजूद हैं और किसी भी स्थायी समझौते के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होगी।

लेकिन दुनिया के लिए भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है—युद्ध का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए।

अब नजर इस बात पर होगी कि भारत की यह पहल आगे किस दिशा में जाती है और क्या नई दिल्ली वास्तव में मॉस्को और कीव के बीच बातचीत की मेज तक दोनों पक्षों को लाने में कामयाब होती है।