Thursday, July 16, 2026

पुरी से लेकर कराची तक निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ने एक बार फिर यह दिखाया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती। अलग-अलग देशों में रहने वाले श्रद्धालु अपनी परंपराओं और संस्कृति को आज भी पूरे सम्मान के साथ जीवित रखे हुए हैं

Pakistan To Puri: Karachi में भी निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, गूंजा 'जय जगन्नाथ' |

नमस्कार, मैं हूं 4s news और आप देख रहे हैं 

जब पुरी की सड़कों पर लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ को खींच रहे थे, उसी समय एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पाकिस्तान के कराची में भी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकली, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान "हरे कृष्ण" और "जय जगन्नाथ" के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।


पुरी से लेकर पाकिस्तान तक आस्था का उत्सव

ओडिशा के पुरी में आयोजित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा में इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन भव्य रथों पर विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है।


कराची की सड़कों पर निकली रथ यात्रा

इस बार पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली गई। रंग-बिरंगे फूलों से सजे रथ के साथ श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। कई लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और पूरे रास्ते "हरे राम, हरे कृष्ण" तथा "जय जगन्नाथ" के जयकारे लगाते रहे।


दुनियाभर में दिखी जगन्नाथ भक्ति

केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश, जापान, लंदन समेत कई देशों में भी जगन्नाथ रथ यात्रा के आयोजन हुए। इससे यह संदेश गया कि भगवान जगन्नाथ की परंपरा अब केवल पुरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के अनेक देशों तक पहुंच चुकी है।


रथ यात्रा का महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं।


पुरी से लेकर कराची तक निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ने एक बार फिर यह दिखाया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती। अलग-अलग देशों में रहने वाले श्रद्धालु अपनी परंपराओं और संस्कृति को आज भी पूरे सम्मान के साथ जीवित रखे हुए हैं।

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