जर्मनी इस समय हाल के वर्षों की सबसे भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। कई इलाकों में तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। लगातार पड़ रही गर्मी ने लोगों की दिनचर्या ही नहीं, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी प्रभावित कर दिया है।
हालात ऐसे हैं कि कई जगह सड़कों की सतह गर्मी के कारण उखड़ने और पिघलने लगी। कुछ हिस्सों में ऑटोबान हाईवे को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जबकि रेल लाइनों पर भी असर पड़ा और कई ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जर्मनी जैसे विकसित देश में अधिकांश घरों में एयर कंडीशनर नहीं हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यूरोप के इस हिस्से में पारंपरिक रूप से मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा है। इसलिए घरों का निर्माण गर्मी से बचाव की बजाय सर्दी से सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया था। लंबे समय तक AC की जरूरत महसूस ही नहीं हुई।
लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव अधिक बार और अधिक तीव्र होने लगी हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी से जुड़ी समस्याओं के मरीज बढ़ रहे हैं। कई शहरों में लोगों को ठंडी जगहों पर रहने, पर्याप्त पानी पीने और दोपहर में बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
जर्मनी के कुछ अस्पतालों और वृद्धाश्रमों में भी गर्मी बड़ी चुनौती बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार, सभी अस्पतालों के मरीजों के कमरों में एयर कंडीशनिंग उपलब्ध नहीं है, जिससे बुजुर्ग और बीमार लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक मौसम की घटना नहीं है। यूरोप में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी इस बात का संकेत है कि बदलती जलवायु अब विकसित देशों के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुकी है। आने वाले वर्षों में शहरों की योजना, भवन निर्माण और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।