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Thursday, September 10, 2026

श्री गणेशाय नमः 🙏 जब भी किसी शुभ कार्य की शुरुआत होती है, सबसे पहले स्मरण किया जाता है विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का। गणपति बप्पा की भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्री गणेशाय नमः 🙏

जब भी किसी शुभ कार्य की शुरुआत होती है, सबसे पहले स्मरण किया जाता है विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का।
गणपति बप्पा की भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

“एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरी तनयाय धीमहि…”

यह मंत्र भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप और उनकी महिमा का स्मरण कराता है। एकदंत, वक्रतुण्ड और गौरी पुत्र गणेश को समर्पित यह भक्ति गीत श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है।

इस मधुर प्रस्तुति में शंकर महादेवन की दमदार और भावपूर्ण आवाज़ गणेश भक्ति के भाव को और भी प्रभावशाली बना देती है। गीत के शब्दों में गणपति की महिमा है, तो संगीत में भक्ति और श्रद्धा का सुंदर संगम सुनाई देता है।

मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नों को दूर करने वाले और बुद्धि-विवेक प्रदान करने वाले देवता हैं। इसलिए भक्त पूरे विश्वास के साथ गणपति बप्पा का नाम लेते हैं और अपने जीवन की हर नई शुरुआत उनके चरणों में समर्पित करते हैं।

अगर आपके मन में भी गणपति बप्पा के लिए श्रद्धा है, तो इस भक्ति गीत को पूरे मन से सुनिए और भगवान गणेश का स्मरण कीजिए।

गणपति बप्पा मोरया! 🙏
मंगल मूर्ति मोरया! 🙏

वीडियो पसंद आए तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसे ही भक्ति गीतों के लिए चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।

Sunday, September 6, 2026

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान... अब तू ही मेरा सहारा है... कहते हैं, जब इंसान की उम्मीदें टूट जाती हैं, जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, जब रास्ते दिखाई नहीं देते...

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...
अब तू ही मेरा सहारा है...

कहते हैं, जब इंसान की उम्मीदें टूट जाती हैं,
जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं,
जब रास्ते दिखाई नहीं देते...

तब एक नाम ऐसा है,
जिसे पुकारने के लिए किसी पहचान की जरूरत नहीं...

बस दिल से कहना होता है—

जय बजरंगबली!

एक छोटा-सा भक्त था।
जिंदगी में परेशानियां इतनी थीं कि उसे समझ नहीं आता था कि आखिर जाए तो जाए कहां।

जिससे मदद की उम्मीद की, वहां निराशा मिली।
जिस दरवाजे पर भरोसा किया, वह दरवाजा बंद मिला।

एक रात वह अकेला बैठकर आसमान की तरफ देखने लगा।

उसकी आंखों में आंसू थे।

उसने हाथ जोड़कर कहा—

“हे हनुमान... मैंने सबके भरोसे जीकर देख लिया।
अब मैंने खुद को तेरे भरोसे छोड़ दिया है।”

उस रात उसके पास कोई जवाब नहीं आया।

लेकिन उसके मन में अचानक एक अजीब-सी शांति उतरने लगी।

उसे लगा जैसे कोई कह रहा हो—

“चिंता मत कर...
जिसे तू अपना समझकर मेरे पास आया है,
उसे मैं कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा।”

यही तो हनुमान भक्ति है।

यह केवल मंदिर में जाकर सिर झुकाने का नाम नहीं...

यह उस भरोसे का नाम है,
जहां इंसान मुश्किल में भी कहता है—

“मेरे राम के सेवक मेरे साथ हैं।”

नीम करोली बाबा भी अपने जीवन में हनुमान भक्ति और सेवा के संदेश के लिए जाने जाते हैं।

उनकी शिक्षाओं में प्रेम, सेवा और भगवान के प्रति समर्पण का भाव दिखाई देता है।

कहते हैं—

जब मन में अहंकार कम होता है,
तो विश्वास बढ़ता है।

और जब विश्वास हनुमान पर हो...

तो मुश्किल रास्ते भी आसान लगने लगते हैं।

क्योंकि भक्त को यह भरोसा रहता है कि
मैं अकेला नहीं हूं।

मेरी ताकत कम हो सकती है...

मेरे साधन कम हो सकते हैं...

लेकिन मेरा भरोसा बड़ा है।

हनुमान जी पर भरोसा है।

इसलिए अगर आज आपकी जिंदगी में भी कोई परेशानी है...

अगर कोई रास्ता बंद दिखाई दे रहा है...

अगर आपको लग रहा है कि कोई आपका साथ नहीं दे रहा...

तो एक बार आंखें बंद करके सच्चे मन से कहिए—

“हे पवनपुत्र हनुमान,
मैंने तेरे ही भरोसे अपनी जिंदगी छोड़ी है।
अब तू ही मेरा मार्गदर्शन करना।”

क्योंकि कभी-कभी
समस्या खत्म होने से पहले
भगवान हमारे अंदर उसे सहने की शक्ति पैदा करते हैं।

और शायद...

आपकी जिंदगी में भी
वह शक्ति जागने का समय आ गया है।

बस विश्वास रखिए।

प्रार्थना करते रहिए।

सेवा करते रहिए।

और हनुमान जी का नाम लेते रहिए।

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...
अब तू ही मेरा सहारा है।

जय श्री राम 🚩
जय बजरंगबली 🚩

Thursday, August 6, 2026

🌺 श्री हनुमान चालीसा 🌺 ॥ श्री हनुमते नमः ॥ दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

🌺 श्री हनुमान चालीसा 🌺

॥ श्री हनुमते नमः ॥

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिक

Tuesday, August 4, 2026

मेरे तन में भी शिव, मेरे मन में भी शिव | Shiv Naam Kirtan | शिव भजन

मेरे तन में भी शिव, मेरे मन में भी शिव | Shiv Naam Kirtan | शिव भजन

(मुखड़ा)

मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव।
हर धड़कन में बसते हैं,
भोले शंकर शिव॥

(अंतरा 1)

जटा में गंगा, शीश चंद्रमा,
गले विराजे नाग।
डमरू की पावन धुन सुनकर,
मिट जाए हर दाग॥

हर-हर महादेव का नारा,
गूंजे चारों धाम।
जो भी सच्चे मन से बोले,
सँवर जाए उसका काम॥

(कोरस)

ॐ नमः शिवाय... ॐ नमः शिवाय...
हर-हर महादेव... हर-हर महादेव...
मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव॥

(अंतरा 2)

कैलाशपति, करुणा सागर,
सबके पालनहार।
भक्तों के संकट हर लेते,
करते बेड़ा पार॥

भस्म रमाए, त्रिशूल उठाए,
नंदी जिनके साथ।
एक पुकार सुन लेते भोले,
देते सच्चा साथ॥

(कोरस)

मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव।
हर श्वास में बसते हैं,
भोलेनाथ ही शिव॥

(अंतरा 3)

श्रावण मास हो या हो फागुन,
नाम रहे हर बार।
शिव की भक्ति जिसने पाई,
उसका हुआ उद्धार॥

भोले-भोले कहते-कहते,
मन हो जाए शुद्ध।
शिव चरणों में शीश झुकाकर,
मिलता जीवन-बोध॥

(समापन)

मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव।
हर जन्म में साथ रहें,
मेरे भोलेनाथ शिव॥

हर-हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय!

Thursday, March 19, 2026

आप योग करे या ना करें, मगर जरूरत पड़ने पर सहयोग जरूर करें

 आप योग करे या ना करें,


मगर जरूरत पड़ने पर सहयोग जरूर करें

❝जहाँ हमारा स्वार्थ समाप्त होता हे, वही से हमारी इंसानियत आरम्भ होती है।❜❜

 ❝जहाँ हमारा स्वार्थ समाप्त होता हे, 


वही से हमारी इंसानियत आरम्भ होती है।❜❜

हालात चाहे जैसे भी हो डटे रहो क्योकि सही समय आने पर खट्टी केरी भी मीठे आम में बदल जाती है ।

 हालात चाहे जैसे भी हो डटे रहो


क्योकि सही समय आने पर खट्टी केरी भी मीठे आम में बदल जाती है ।

जिंदगी में *हजारों* लोग *आवाज़* देंगे…! 🗣️ *मगर* वहीं बैठना *जहाँ* *बैठकर* अपनापन का *एहसास* हो…!! 🤍🌿 🌼✨ *Good Morning* ✨🌼

 जिंदगी में *हजारों* लोग *आवाज़* देंगे…! 🗣️

*मगर* वहीं बैठना *जहाँ* *बैठकर* अपनापन का *एहसास* हो…!! 🤍🌿


🌼✨ *Good Morning* ✨🌼

Saturday, March 7, 2026

धीरे-धीरे समझ आ रहा है कि सुन्दरता चेहरे में नहीं पैसे में होती है..!!


 

💔 *मोहब्बत* हमने सच्चे दिल से की थी, पर शायद *किस्मत* को मंज़ूर नहीं था। जिसे अपनी दुनिया समझा, वो ही *हमारा* नहीं था। अब बस *यादों* का सहारा है, और दिल में एक खामोशी… जो हर रात उसका *नाम* लेती है।


 
 वाह रे *जिंदगी*! 😔✨

*भरोसा* तेरा एक *पल* का *नही*, 🤲💔
और *नखरे* तेरे, 😒🔥
*मौत* से भी *ज्यादा*। ☠️💯


 *काम* करते *वालों* की 💪🔥
कदर *करो* 🙏✨
*कान* भरने वालों की *नहीं* 😒


परखा *बहुत* गया *मुझे*… 😔💔
*लेकिन* समझा *नहीं* गया… 🤐🥀

 *गलतफ़हमियों* के *सिलसिले* आज इतने *दिलचस्प* हैं.. 😌💭
कि *हर ईंट* सोचती है 🧱
*दीवार* मुझपे *टिकी* है.. 🏠💯

*साँपों* के *मुकद्दर* में वो *ज़हर* कहाँ… 🐍
जो इंसान *आजकल* 😶
*सिर्फ* अपनी *बातों* से ही *उगल* देता है…!!! 🗣️💔

*मेरा* यही *अंदाज़* इस जमाने को *खलता* है 😌🔥
कि इतनी *ठोकरों* के बाद *भी* 🚶‍♂️💔
ये *सीधा* कैसे *चलता* है..!! 💯✨

*मेरे दोस्त* छोटा सा एक बीज अगर जमीन फाड़कर पेड़ बन सकता है, तो आप तो इंसान हैं। बस लगे रहिए!"


 

Tuesday, March 3, 2026

आईने में खड़ा वो शख्स, आज तुझसे तेरा हिसाब मांगता है, तूने जो कत्ल किए अपने ख्वाबों के, उनका जवाब मांगता है। कब तक बहाने बनाएगा दुनिया के सामने तू? तेरा वजूद आज तुझसे ही अपनी पहचान मांगता है।

 आईने में खड़ा वो शख्स, 

आज तुझसे तेरा हिसाब मांगता है,


तूने जो कत्ल किए अपने ख्वाबों के, 

उनका जवाब मांगता है।


कब तक बहाने बनाएगा दुनिया के सामने तू?

तेरा वजूद आज तुझसे ही अपनी पहचान मांगता है।

Tuesday, February 24, 2026

इंसान 2 लोगों से हमेशा हार जाता है, एक अपने परिवार से और दूसरा अपने प्यार से… 🥰🙂

 इंसान 2 लोगों से हमेशा हार जाता है,
एक अपने परिवार से और दूसरा अपने प्यार से…


🥰🙂

जिसपर अहंकार का साया होता है, उसके लिए अपना भी पराया होता है।

 जिसपर अहंकार का साया होता है, उसके लिए अपना भी पराया होता है।

Wednesday, February 11, 2026

मजेदार जोक्स पत्नी:- जिम जाया करो खा- खाकर पेट निकल आया है पति:- पेट तो तुम्हारे भी निकल आया है Funny Hindi Jokes पत्नी:- मैं तो माँ बनने वाली हूँ पति:- तो मैं भी तो बाप बनने वाला हूँ 😆 😂 😂

 


Funny Chutkule एक बात समझ नहीं आती.. धनवान मित्रों से मित्रता करो तो हम धनवान नहीं बन जाते.. ऐसे ही, होशियार मित्रों से मित्रता करो तो हम होशियार नहीं बन जाते.. लेकिन.. बेवड़े मित्रों से मित्रता करो तो हम बेवड़े कैसे बन जाते हैं? 😂 😂 😂

 Funny Chutkule

एक बात समझ नहीं आती..

धनवान मित्रों से मित्रता करो तो हम

धनवान नहीं बन जाते..

ऐसे ही,

होशियार मित्रों से मित्रता करो

तो हम होशियार नहीं बन जाते..

लेकिन..

बेवड़े मित्रों से मित्रता करो

तो हम बेवड़े कैसे बन जाते हैं?

😂 😂 😂

Thursday, October 23, 2025

*एक बार एक कंजूस लड़के को एक कंजूस लड़की से प्यार हो जाता है।* .

 *एक बार एक कंजूस लड़के को एक कंजूस लड़की से प्यार हो जाता है।*

.

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*लड़की-जब पापा घर पर नहीं होंगे तो मैं गली में सिक्का फेंकुंगी, आवाज सुन कर तुम तुरंत अन्दर आ जाना।*

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*लेकिन लड़का सिक्का फेंकने के एक घंटे बाद आया।*

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*लड़की-इतनी देर क्यों लगा दी?* 

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*लड़का-वो मैं सिक्का ढूंढ रहा था।*


*लड़की-पागल वो तो धागा बांध कर फेंका था, वापस खींच लिया।*😂


🤣😃😄😀😆😄😂😁😂😁

Wednesday, October 15, 2025

अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही? दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं? इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते।आज की शब्दावली के अनुसार कुछ ‘लिबरर्ल्स लोग’ युवाओं और बच्चों के मस्तिष्क में यह प्रश्न डाल रहें हैं कि लक्ष्मी पूजन का औचित्य क्या है, जबकि दीपावली का उत्सव राम से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर वह बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं कि सनातन धर्म और सनातन त्यौहारों का आपस में कोई तारतम्य नहीं है।सनातन धर्म बेकार है।आप अपने बच्चों को इन प्रश्नों के सही उत्तर बतायें। दीपावली का उत्सव दो युग, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मीजी का पूजन होता है। भगवान राम भी त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने घर घर दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है।अत: इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपों से जुड़ा है। लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है? लक्ष्मी जी सागरमन्थन में मिलीं, भगवान विष्णु ने उनसे विवाह किया और उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया। लक्ष्मी जी ने धन बाँटने के लिए कुबेर को अपने साथ रखा। कुबेर बड़े ही कंजूस थे, वे धन बाँटते ही नहीं थे।वे खुद धन के भंडारी बन कर बैठ गए। माता लक्ष्मी खिन्न हो गईं, उनकी सन्तानों को कृपा नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई। भगवान विष्णु ने कहा कि तुम कुबेर के स्थान पर किसी अन्य को धन बाँटने का काम सौंप दो। माँ लक्ष्मी बोली कि यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं उन्हें बुरा लगेगा। तब भगवान विष्णु ने उन्हें गणेश जी की विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने गणेश जी को भी कुबेर के साथ बैठा दिया। गणेश जी ठहरे महाबुद्धिमान। वे बोले, माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊँगा , उस पर आप कृपा कर देना, कोई किंतु परन्तु नहीं। माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी।अब गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न, रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे।कुबेर भंडारी देखते रह गए, गणेश जी कुबेर के भंडार का द्वार खोलने वाले बन गए। गणेश जी की भक्तों के प्रति ममता कृपा देख माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्रीगणेश को आशीर्वाद दिया कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें। दीवाली आती है कार्तिक अमावस्या को, भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं, वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद देव उठनी एकादशी को। माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में।इसलिए वे अपने सँग ले आती हैं अपने मानस पुत्र गणेश जी को। इसलिए दीवाली को लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है। यह कैसी विडंबना है कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नही है और जो वर्णन है वह अधूरा है।इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों और अपनी अगली पीढ़ी को भी बतायें। दूसरों के साथ साझा करना भी ना भूलेंI 🌹🌻🌹🌻🌹🌻🪷💕🩷💝💝❤‍🔥💖❣️💞🪯👩‍❤️‍👨Ⓜ️♏🕉️🕉️🕉️🕉️🙏🙏🙏🙏🙏🙏

 अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही? 

दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं?


इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते।आज की शब्दावली के अनुसार कुछ ‘लिबरर्ल्स लोग’  युवाओं और बच्चों के मस्तिष्क में यह प्रश्न डाल रहें हैं कि लक्ष्मी पूजन का औचित्य क्या है, जबकि दीपावली का उत्सव राम से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर वह बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं कि सनातन धर्म और सनातन त्यौहारों का आपस में कोई तारतम्य नहीं है।सनातन धर्म बेकार है।आप अपने बच्चों को इन प्रश्नों के सही उत्तर बतायें।


दीपावली का उत्सव दो युग, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मीजी का पूजन होता है। भगवान राम भी त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने घर घर दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है।अत: इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपों से जुड़ा है।


लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है

और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है?


लक्ष्मी जी सागरमन्थन में मिलीं, भगवान विष्णु ने उनसे विवाह किया और उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया। लक्ष्मी जी ने धन बाँटने के लिए कुबेर को अपने साथ रखा। कुबेर बड़े ही कंजूस थे, वे धन बाँटते ही नहीं थे।वे खुद धन के भंडारी बन कर बैठ गए। माता लक्ष्मी खिन्न हो गईं, उनकी सन्तानों को कृपा नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई। भगवान विष्णु ने कहा कि तुम कुबेर के स्थान पर किसी अन्य को धन बाँटने का काम सौंप दो। माँ लक्ष्मी बोली कि यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं उन्हें बुरा लगेगा।

तब भगवान विष्णु ने उन्हें गणेश जी की  विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने गणेश जी को भी कुबेर के साथ बैठा दिया। गणेश जी ठहरे महाबुद्धिमान। वे बोले, माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊँगा , उस पर आप कृपा कर देना, कोई किंतु परन्तु नहीं। माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी।अब गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न, रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे।कुबेर भंडारी देखते रह गए, गणेश जी कुबेर के भंडार का द्वार खोलने वाले बन गए। गणेश जी की भक्तों के प्रति ममता कृपा देख माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्रीगणेश को आशीर्वाद दिया कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें।


दीवाली आती है कार्तिक अमावस्या को, भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं, वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद देव उठनी एकादशी को। माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में।इसलिए वे अपने सँग ले आती हैं अपने मानस पुत्र गणेश जी को।

इसलिए दीवाली को लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है।


यह कैसी विडंबना है कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नही है और जो वर्णन है वह अधूरा है।इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों और अपनी अगली पीढ़ी को भी बतायें। दूसरों के साथ साझा करना भी ना भूलेंI

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