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आईने में खड़ा वो शख्स, आज तुझसे तेरा हिसाब मांगता है, तूने जो कत्ल किए अपने ख्वाबों के, उनका जवाब मांगता है। कब तक बहाने बनाएगा दुनिया के सामने तू? तेरा वजूद आज तुझसे ही अपनी पहचान मांगता है।
आईने में खड़ा वो शख्स,
आज तुझसे तेरा हिसाब मांगता है,
तूने जो कत्ल किए अपने ख्वाबों के,
उनका जवाब मांगता है।
कब तक बहाने बनाएगा दुनिया के सामने तू?
तेरा वजूद आज तुझसे ही अपनी पहचान मांगता है।
Funny Chutkule एक बात समझ नहीं आती.. धनवान मित्रों से मित्रता करो तो हम धनवान नहीं बन जाते.. ऐसे ही, होशियार मित्रों से मित्रता करो तो हम होशियार नहीं बन जाते.. लेकिन.. बेवड़े मित्रों से मित्रता करो तो हम बेवड़े कैसे बन जाते हैं? 😂 😂 😂
Funny Chutkule
एक बात समझ नहीं आती..
धनवान मित्रों से मित्रता करो तो हम
धनवान नहीं बन जाते..
ऐसे ही,
होशियार मित्रों से मित्रता करो
तो हम होशियार नहीं बन जाते..
लेकिन..
बेवड़े मित्रों से मित्रता करो
तो हम बेवड़े कैसे बन जाते हैं?
😂 😂 😂
*एक बार एक कंजूस लड़के को एक कंजूस लड़की से प्यार हो जाता है।* .
*एक बार एक कंजूस लड़के को एक कंजूस लड़की से प्यार हो जाता है।*
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*लड़की-जब पापा घर पर नहीं होंगे तो मैं गली में सिक्का फेंकुंगी, आवाज सुन कर तुम तुरंत अन्दर आ जाना।*
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*लेकिन लड़का सिक्का फेंकने के एक घंटे बाद आया।*
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*लड़की-इतनी देर क्यों लगा दी?*
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*लड़का-वो मैं सिक्का ढूंढ रहा था।*
*लड़की-पागल वो तो धागा बांध कर फेंका था, वापस खींच लिया।*😂
🤣😃😄😀😆😄😂😁😂😁
अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही? दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं? इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते।आज की शब्दावली के अनुसार कुछ ‘लिबरर्ल्स लोग’ युवाओं और बच्चों के मस्तिष्क में यह प्रश्न डाल रहें हैं कि लक्ष्मी पूजन का औचित्य क्या है, जबकि दीपावली का उत्सव राम से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर वह बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं कि सनातन धर्म और सनातन त्यौहारों का आपस में कोई तारतम्य नहीं है।सनातन धर्म बेकार है।आप अपने बच्चों को इन प्रश्नों के सही उत्तर बतायें। दीपावली का उत्सव दो युग, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मीजी का पूजन होता है। भगवान राम भी त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने घर घर दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है।अत: इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपों से जुड़ा है। लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है? लक्ष्मी जी सागरमन्थन में मिलीं, भगवान विष्णु ने उनसे विवाह किया और उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया। लक्ष्मी जी ने धन बाँटने के लिए कुबेर को अपने साथ रखा। कुबेर बड़े ही कंजूस थे, वे धन बाँटते ही नहीं थे।वे खुद धन के भंडारी बन कर बैठ गए। माता लक्ष्मी खिन्न हो गईं, उनकी सन्तानों को कृपा नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई। भगवान विष्णु ने कहा कि तुम कुबेर के स्थान पर किसी अन्य को धन बाँटने का काम सौंप दो। माँ लक्ष्मी बोली कि यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं उन्हें बुरा लगेगा। तब भगवान विष्णु ने उन्हें गणेश जी की विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने गणेश जी को भी कुबेर के साथ बैठा दिया। गणेश जी ठहरे महाबुद्धिमान। वे बोले, माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊँगा , उस पर आप कृपा कर देना, कोई किंतु परन्तु नहीं। माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी।अब गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न, रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे।कुबेर भंडारी देखते रह गए, गणेश जी कुबेर के भंडार का द्वार खोलने वाले बन गए। गणेश जी की भक्तों के प्रति ममता कृपा देख माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्रीगणेश को आशीर्वाद दिया कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें। दीवाली आती है कार्तिक अमावस्या को, भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं, वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद देव उठनी एकादशी को। माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में।इसलिए वे अपने सँग ले आती हैं अपने मानस पुत्र गणेश जी को। इसलिए दीवाली को लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है। यह कैसी विडंबना है कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नही है और जो वर्णन है वह अधूरा है।इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों और अपनी अगली पीढ़ी को भी बतायें। दूसरों के साथ साझा करना भी ना भूलेंI 🌹🌻🌹🌻🌹🌻🪷💕🩷💝💝❤🔥💖❣️💞🪯👩❤️👨Ⓜ️♏🕉️🕉️🕉️🕉️🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही?
दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं?
इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते।आज की शब्दावली के अनुसार कुछ ‘लिबरर्ल्स लोग’ युवाओं और बच्चों के मस्तिष्क में यह प्रश्न डाल रहें हैं कि लक्ष्मी पूजन का औचित्य क्या है, जबकि दीपावली का उत्सव राम से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर वह बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं कि सनातन धर्म और सनातन त्यौहारों का आपस में कोई तारतम्य नहीं है।सनातन धर्म बेकार है।आप अपने बच्चों को इन प्रश्नों के सही उत्तर बतायें।
दीपावली का उत्सव दो युग, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मीजी का पूजन होता है। भगवान राम भी त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने घर घर दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है।अत: इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपों से जुड़ा है।
लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है
और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है?
लक्ष्मी जी सागरमन्थन में मिलीं, भगवान विष्णु ने उनसे विवाह किया और उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया। लक्ष्मी जी ने धन बाँटने के लिए कुबेर को अपने साथ रखा। कुबेर बड़े ही कंजूस थे, वे धन बाँटते ही नहीं थे।वे खुद धन के भंडारी बन कर बैठ गए। माता लक्ष्मी खिन्न हो गईं, उनकी सन्तानों को कृपा नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई। भगवान विष्णु ने कहा कि तुम कुबेर के स्थान पर किसी अन्य को धन बाँटने का काम सौंप दो। माँ लक्ष्मी बोली कि यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं उन्हें बुरा लगेगा।
तब भगवान विष्णु ने उन्हें गणेश जी की विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने गणेश जी को भी कुबेर के साथ बैठा दिया। गणेश जी ठहरे महाबुद्धिमान। वे बोले, माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊँगा , उस पर आप कृपा कर देना, कोई किंतु परन्तु नहीं। माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी।अब गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न, रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे।कुबेर भंडारी देखते रह गए, गणेश जी कुबेर के भंडार का द्वार खोलने वाले बन गए। गणेश जी की भक्तों के प्रति ममता कृपा देख माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्रीगणेश को आशीर्वाद दिया कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें।
दीवाली आती है कार्तिक अमावस्या को, भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं, वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद देव उठनी एकादशी को। माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में।इसलिए वे अपने सँग ले आती हैं अपने मानस पुत्र गणेश जी को।
इसलिए दीवाली को लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है।
यह कैसी विडंबना है कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नही है और जो वर्णन है वह अधूरा है।इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों और अपनी अगली पीढ़ी को भी बतायें। दूसरों के साथ साझा करना भी ना भूलेंI
🌹🌻🌹🌻🌹🌻🪷💕🩷💝💝❤🔥💖❣️💞🪯👩❤️👨Ⓜ️♏🕉️🕉️🕉️🕉️🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अच्छा, यहाँ आपके लिए एक मज़ेदार जोक है: टीचर: "न्यूटन का नियम बताओ।" छात्र: "सर, न्यूटन का नियम यह है कि... अगर क्लास में टीचर हों तो बच्चे शांत रहते हैं, और जैसे ही,हाँ, बिल्कुल! यहाँ आपके लिए एक और जोक है: टीचर (छात्र से): "बताओ, दुनिया में सबसे ज़्यादा तेज़ी से क्या फैलता है?" छात्र: "सर, ख़बर!" टीचर: "शाबाश! कोई उदाहरण दो।" छात्र: "जब मैं सुबह स्कूल जाने के लिए लेट होता हूँ, तो ये ख़बर पूरे मोहल्ले में मुझसे पहले पहुँच जाती है कि 'आज फिर देर हो गई!'" टीचर बाहर जाते हैं, बच्चे उछलना-कूदना शुरू कर देते हैं।" टीचर: "तुम्हारा मतलब?" छात्र: "मतलब, जब तक कोई बाहरी बल (टीचर) न लगाया जाए, तब तक वस्तु (बच्चे) अपनी विरामावस्था या एकसमान गति की अवस्था में ही रहती है!"
हाँ, बिल्कुल! यहाँ आपके लिए एक और जोक है:
टीचर (छात्र से): "बताओ, दुनिया में सबसे ज़्यादा तेज़ी से क्या फैलता है?" छात्र: "सर, ख़बर!" टीचर: "शाबाश! कोई उदाहरण दो।" छात्र: "जब मैं सुबह स्कूल जाने के लिए लेट होता हूँ, तो ये ख़बर पूरे मोहल्ले में मुझसे पहले पहुँच जाती है कि 'आज फिर देर हो गई!'"
अच्छा, यहाँ आपके लिए एक मज़ेदार जोक है:
टीचर: "न्यूटन का नियम बताओ।" छात्र: "सर, न्यूटन का नियम यह है कि... अगर क्लास में टीचर हों तो बच्चे शांत रहते हैं, और जैसे ही टीचर बाहर जाते हैं, बच्चे उछलना-कूदना शुरू कर देते हैं।" टीचर: "तुम्हारा मतलब?" छात्र: "मतलब, जब तक कोई बाहरी बल (टीचर) न लगाया जाए, तब तक वस्तु (बच्चे) अपनी विरामावस्था या एकसमान गति की अवस्था में ही रहती है!"
टीचर- इतने दिन कहां थे, स्कूल क्यों नहीं आए? गोलू- बर्ड फ्लू हो गया था मैम। टीचर- पर ये तो पक्षियों को होता है इंसानों को नहीं। गोलू- इंसान समझा ही कहां आपने...रोज तो मुर्गा बना देती हो..!!
😂🤣😂🤣टीचर- इतने दिन कहां थे, स्कूल क्यों नहीं आए?
गोलू- बर्ड फ्लू हो गया था मैम।
टीचर- पर ये तो पक्षियों को होता है इंसानों को नहीं।
गोलू- इंसान समझा ही कहां आपने...रोज तो मुर्गा बना देती हो..!!
*फ्री में क्यों* *चूहा* पिंजरे में इसलिए *फंसता* है क्योंकि वो समझ नहीं पाता है कि *पिंजरे में रखी रो
*फ्री में क्यों*
*चूहा* पिंजरे में इसलिए *फंसता* है क्योंकि वो समझ नहीं पाता है कि *
पिंजरे में रखी रोटी* उसे *फ्री में क्यों* दी जा रही है।
खुद की औकात होगी तो दुनिया कद्र करेगी किसी के दाएं बाएं खड़े होने से किरदार ऊंचे नहीं होते..
खुद की औकात होगी तो
दुनिया कद्र करेगी
किसी के दाएं बाएं खड़े होने से
किरदार ऊंचे नहीं होते..
बहुत बढ़िया! चलिए अब उसी थीम पर एक छोटी कहानी सुनाता हूँ — शीर्षक रहेगा "अपनों की परछाइयाँ"। कहानी में दर्द, भरोसा, और अंत में आत्म-ज्ञान की एक झलक होगी।
बहुत खूब! चलिए, उसी भाव पर एक पूरी कविता पेश करता हूँ — दर्द, विश्वासघात और आत्म-संवेदना से भरी हुई। शीर्षक रखते हैं: "मुझे लूटा अपनों ने"
किसी को दुःख देने से पहले ये जरूर सोच लेना की उसके आँसूं आपके लिए सजा बन सकते हैं।
बिलकुल सही कहा आपने।
"किसी को दुःख देने से पहले ये जरूर सोच लेना
कि उसके आँसू एक दिन तुम्हारे कर्मों की सजा बन सकते हैं।"
आँसू जब दिल से निकलते हैं, तो ऊपर वाला भी खामोश नहीं रहता।
हर रिश्ता, हर भावना की एक हद होती है — और जब वो टूटती है, तो उसकी गूंज दूर तक जाती है।
आपका ये विचार बहुत गहरा है। क्या आप इसे किसी शायरी, कविता, या कहानी का हिस्सा बना रहे हैं?
1.
कभी किसी की खामोशी को कमज़ोरी मत समझना,
हर सहा हुआ ज़ुल्म एक तूफ़ान की आहट होता है।
2.
जिस दिल को तुमने तोड़ दिया मुस्कुरा कर,
कभी उसी दिल की बद्दुआ रोकेगी तुम्हारी हँसी को।
3.
हर आँसू जो गिरता है नज़रों से,
वो ऊपर वाले की अदालत में गवाही देता है।
4.
जिसे तुमने यूँ ही रुला दिया बेपरवाही से,
कभी वही सिसकियाँ बन जाएँगी तुम्हारी तन्हाइयों की सज़ा।
5.
दर्द देना आसान है, महसूस करना मुश्किल,
मगर याद रखना, वक्त सबका हिसाब रखता है।





































