Monday, August 10, 2026

$312 बिलियन का दांव, India -UAE की नई 'सिल्क रोड' से हिला Europe ? | BRICS

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का BRICS देशों के साथ गैर-तेल (non-oil) व्यापार हाल ही में $312 बिलियन से अधिक दर्ज किया गया है। इस आर्थिक प्रगति और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) — जिसे 'आधुनिक सिल्क रोड' भी कहा जा रहा है — के कारण यह मुद्दा वैश्विक मंच पर चर्चा में है।

1. $312 बिलियन का आंकड़ा और BRICS का दांव

जयपुर में आयोजित BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान UAE के विदेश व्यापार मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी ने खुलासा किया कि BRICS समूह (भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्यों) के साथ UAE का गैर-तेल व्यापार $312 बिलियन के पार पहुंच गया है।

  • ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब: UAE अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स के केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।

  • लोकल करेंसी ट्रेड: BRICS देश लगातार डॉलर के अलावा अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (जैसे रुपये और दिरहम) में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा रहे हैं।

2. भारत-UAE 'नई सिल्क रोड' (IMEC)

G20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) भारत से यूरोप तक का एक बहु-मॉडल (समुद्री और रेल) व्यापार मार्ग है:

  • ईस्टर्न कॉरिडोर: भारत के पश्चिमी बंदरगाहों (जैसे मुंबई/मुंद्रा) को UAE के जेबेल अली (Jebel Ali) बंदरगाह से जोड़ता है।

  • नॉर्दर्न कॉरिडोर: UAE और सऊदी अरब से होते हुए रेलवे लाइन के जरिए इजराइल के हाइफा बंदरगाह तक जाता है, जहां से यूरोप (ग्रीस, इटली, फ्रांस) के लिए समुद्री मार्ग जुड़ता है।

3. यूरोप और पश्चिमी देशों पर प्रभाव

पहलूप्रभाव व बदलाव
समय और लागत की बचतपारंपरिक स्वेज नहर (Suez Canal) मार्ग की तुलना में व्यापार पारगमन समय में 40% तक की कमी और लागत में भारी बचत का अनुमान है।
सुचारू सप्लाई चेनलाल सागर और स्वेज नहर जैसे भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील चोक-पॉइंट्स पर निर्भरता कम होगी।
ऊर्जा और डिजिटल हाईवेइस मार्ग पर केवल माल ही नहीं, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन पाइपलाइन, बिजली ग्रिड और ऑप्टिकल फाइबर डिजिटल केबल भी बिछाए जाने की योजना है।
यूरोप की निर्भरतायूरोप के प्रमुख बंदरगाह (जैसे इटली का ट्रिएस्ट और ग्रीस का पीरियस) एशियाई बाजारों और मध्य पूर्व के ऊर्जा स्रोतों से सीधे जुड़ जाएंगे।

Thursday, August 6, 2026

🇮🇳 US–FCRA NEWS भारत के FCRA कानून पर अमेरिका में मचा हड़कंप! भारत के नए FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर अमेरिका से बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी सांसद Riley Moore ने बिल पर सवाल उठाते हुए इसे ईसाई संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता बताया और चेतावनी दी कि इसका असर भारत-अमेरिका के रिश्तों पर पड़ सकता है। लेकिन भारत सरकार का कहना है कि FCRA का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। बिल में FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में विदेशी फंड से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन और जांच की प्रक्रिया को लेकर नए प्रावधान प्रस्तावित हैं। अब सवाल है—भारत के इस फैसले के सामने अमेरिका का दबाव कितना असरदार होगा?

🇮🇳 US–FCRA NEWS 

भारत के FCRA कानून पर अमेरिका में मचा हड़कंप!

भारत के नए FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर अमेरिका से बड़ा बयान सामने आया है।

अमेरिकी सांसद Riley Moore ने बिल पर सवाल उठाते हुए इसे ईसाई संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता बताया और चेतावनी दी कि इसका असर भारत-अमेरिका के रिश्तों पर पड़ सकता है।

लेकिन भारत सरकार का कहना है कि FCRA का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

बिल में FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में विदेशी फंड से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन और जांच की प्रक्रिया को लेकर नए प्रावधान प्रस्तावित हैं।

अब सवाल है—भारत के इस फैसले के सामने अमेरिका का दबाव कितना असरदार होगा?

🌺 श्री हनुमान चालीसा 🌺 ॥ श्री हनुमते नमः ॥ दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

🌺 श्री हनुमान चालीसा 🌺

॥ श्री हनुमते नमः ॥

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिक

Wednesday, August 5, 2026

शुरू में स्क्रीन पर ] यहीं से महा-गाथा का आरंभ होता है... हमारा सत्य। हमारा इतिहास।

[ शुरू में स्क्रीन पर ]

यहीं से महा-गाथा का आरंभ होता है...
हमारा सत्य। हमारा इतिहास।

[ फिर पीछे से आवाज़ आती है, यही टीज़र का असली डायलॉग है ]

"राम सर्वकाल के महानतम इसलिए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन का हर निर्णय अपने लाभ के लिए नहीं, बल्कि सबके कल्याण के लिए लिया।
इच्छा से ऊपर कर्तव्य को रखा, और स्वयं से ऊपर बलिदान को।"

[ स्क्रीन पर लिखा आता है ]

हमारे नायक, हमारे रक्षक।

[ आखिर में ]

नमित मल्होत्रा की रामायण
निर्देशक - नितेश तिवारी
संगीत - हंस ज़िमर और ए. आर. रहमान
दीवाली 2026 - पूरे विश्व के सिनेमाघरों में
रामायण पार्ट 1

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े वीडियो विवाद के बाद दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी Meta बैकफुट पर नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta के शीर्ष अधिकारियों ने भारत सरकार से माफी मांगी है, जबकि CEO Mark Zuckerberg ने भी कंपनी की कुछ बड़ी चूकों पर खेद जताया है। आखिर पूरा मामला क्या है और इस विवाद का भारत की डिजिटल नीति पर क्या असर पड़ सकता है? आइए समझते हैं।

नमस्कार, आप देख रहे हैं 4S News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े वीडियो विवाद के बाद दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी Meta बैकफुट पर नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta के शीर्ष अधिकारियों ने भारत सरकार से माफी मांगी है, जबकि CEO Mark Zuckerberg ने भी कंपनी की कुछ बड़ी चूकों पर खेद जताया है। आखिर पूरा मामला क्या है और इस विवाद का भारत की डिजिटल नीति पर क्या असर पड़ सकता है? आइए समझते हैं।


क्या है पूरा मामला?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक Facebook पोस्ट को Meta की ओर से गलती से सीमित (restrict) कर दिया गया था। इस घटना के बाद भारत सरकार ने Meta के अधिकारियों को तलब किया और स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट और मॉडरेशन को लेकर भी सवाल उठाए गए।


Meta ने क्या कहा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta के Chief Global Affairs Officer Joel Kaplan ने भारत के आईटी मंत्री से इस "ऑपरेशनल एरर" के लिए आधिकारिक तौर पर माफी मांगी। कंपनी ने कहा कि यह तकनीकी गलती थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कदम उठाए जाएंगे।


Mark Zuckerberg ने किस बात पर जताया खेद?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mark Zuckerberg ने भी भारत सरकार के समक्ष कंपनी की कुछ परिचालन संबंधी कमियों, जिनमें डीपफेक और अवैध कंटेंट से जुड़ी चुनौतियां भी शामिल हैं, पर खेद व्यक्त किया। Meta ने भरोसा दिलाया कि वह अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करेगा।


सरकार का सख्त रुख

इस विवाद के बाद संसदीय समिति ने भी Meta से जवाब मांगा। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो कंपनी के "सेफ हार्बर" संरक्षण पर भी सवाल उठ सकते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर पहले से अधिक सख्त रुख अपना रही है।


इसका क्या मतलब है?

यह मामला केवल एक पोस्ट तक सीमित नहीं है। यह भारत और बड़ी टेक कंपनियों के बीच कंटेंट मॉडरेशन, जवाबदेही और डिजिटल कानूनों को लेकर बढ़ती सख्ती का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों पर नियमों का पालन करने का दबाव और बढ़ सकता है।


आउट्रो

इस पूरे घटनाक्रम पर आपकी क्या राय है?
क्या सोशल मीडिया कंपनियों पर और सख्त नियम लागू होने चाहिए?
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क्या पाकिस्तान का 1971 जैसा ऐतिहासिक विखंडन फिर से होने जा रहा है? आतंकवाद और कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने औपचारिक रूप से 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित कर दिया है और दुनियाभर के देशों से एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग की है! आखिर 11 अगस्त की तारीख का सच क्या है और क्यों इस्लामाबाद में हड़कंप मचा है? आइए देखते हैं इस खास रिपोर्ट में।"

और आप देख रहे हैं आज की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर!

क्या पाकिस्तान का 1971 जैसा ऐतिहासिक विखंडन फिर से होने जा रहा है? आतंकवाद और कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने औपचारिक रूप से 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित कर दिया है और दुनियाभर के देशों से एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग की है! आखिर 11 अगस्त की तारीख का सच क्या है और क्यों इस्लामाबाद में हड़कंप मचा है? आइए देखते हैं इस खास रिपोर्ट में।"

[दृश्य 2: बैकग्राउंड विजुअल्स - नक्शा, विरोध प्रदर्शन और झंडे]

वॉइसओवर (VO):

"पाकिस्तान से अलग होने की दशकों पुरानी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। बलूच नेताओं और 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे से बलूचिस्तान की आजादी को आधिकारिक मान्यता दें।"

स्क्रीन पर ग्राफिक्स और पॉइंट्स:

  1. 11 अगस्त स्वतंत्रता दिवस: बलूच नागरिकों से घरों, दुकानों और संस्थानों पर आजाद बलूचिस्तान का झंडा फहराने का आह्वान।

  2. वैश्विक मान्यता की अपील: यूएन (UN) और भारत समेत दुनिया के प्रमुख देशों से संप्रभु राज्य का दर्जा देने की मांग।

  3. पाक नीतियों पर हमला: बलूच नेताओं का आरोप - 'जब तक पाकिस्तान मौजूद रहेगा, क्षेत्र में शांति संभव नहीं'।

[दृश्य 3: मुख्य विश्लेषण - 11 अगस्त का ऐतिहासिक सच]

वॉइसओवर (VO):

"आखिर बलूच आजादी के लिए 11 अगस्त का दिन ही क्यों चुना गया?

  • 11 अगस्त 1947 का इतिहास: जब ब्रिटिश हुकूमत भारत छोड़ रही थी, तब 11 अगस्त 1947 को कलात (बलूचिस्तान) ने सबसे पहले अपनी संप्रभु आजादी की घोषणा की थी। उस समय ऑल इंडिया रेडियो और द न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस खबर को कवर किया था।

  • मार्च 1948 का जबरन कब्जा: पाकिस्तान ने 14 अगस्त को जन्म लेने के कुछ ही महीनों बाद, मार्च 1948 में अपनी सेना भेजकर बलूचिस्तान पर जबरन सैन्य कब्जा कर लिया।

  • दशकों का शोषण: तब से लेकर आज तक बलूच नागरिक पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों, लापता किए जाने वाले लोगों और अपने प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।"

[दृश्य 4: आउट्रो - स्टूडियो / एंकर ऑन-कैमरा]

एंकर:

"पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ और सैन्य जनरल असीम मुनीर के सामने अब अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ पीओके (PoK) में भड़का जनाक्रोश और दूसरी तरफ बलूचिस्तान की आजादी का खुला ऐलान। क्या दुनिया 1971 के बाद पाकिस्तान का एक और बंटवारा देखने जा रही है?

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वैश्विक अर्थव्यवस्था के शतरंज पर चीन ने एक ऐसी 'सीक्रेट चाल' चली है, जिसने वॉशिंगटन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि बीजिंग के इस गुप्त आर्थिक दांव की वजह से अमेरिका को करीब 90 बिलियन डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये) का सीधा झटका लगा है। आखिर क्या है यह $90B का गणित? कैसे चीन ने अमेरिका के व्यापार और ऊर्जा बाजार की घेराबंदी की है? आइए समझते हैं।"

"नमस्कार, और आप देख रहे हैं दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक जंग की यह विशेष रिपोर्ट।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के शतरंज पर चीन ने एक ऐसी 'सीक्रेट चाल' चली है, जिसने वॉशिंगटन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि बीजिंग के इस गुप्त आर्थिक दांव की वजह से अमेरिका को करीब 90 बिलियन डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये) का सीधा झटका लगा है। आखिर क्या है यह $90B का गणित? कैसे चीन ने अमेरिका के व्यापार और ऊर्जा बाजार की घेराबंदी की है? आइए समझते हैं।"

: बैकग्राउंड व विजुअल्स - वॉशिंगटन vs बीजिंग, ट्रेड ग्राफिक्स]

"ग्लोबल ट्रेड वॉर में अब तक अमेरिका की तरफ से चीन पर टैरिफ और पाबंदियां लगाने की खबरें आती थीं। लेकिन इस बार बाजी पलटती दिख रही है।

अर्थशास्त्रियों और वैश्विक व्यापार रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने पिछले कुछ समय में अमेरिका के निर्यात (Exports), ऊर्जा बाजार (LNG) और डॉलर पर निर्भरता को कम करने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है।"

  1. $90 Billion Trade Hit: अमेरिका के कृषि, एनर्जी और टेक एक्सपोर्ट में चीन के जवाबी कदम।

  2. De-Dollarization & BRICS Pay: अमेरिकी डॉलर को दरकिनार कर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की बढ़त।

  3. Supply Chain Diversification: चीन द्वारा अमेरिकी कृषि और गैस प्रोडक्ट्स के बजाय अन्य देशों से इंपोर्ट बढ़ाना।

: मुख्य बिंदु - चीन के तीन प्रमुख दांव]

"चीन ने अमेरिका को आर्थिक नुकसान पहुँचाने के लिए तीन बड़े मोर्चों पर काम किया है:

  • पहला दांव - अमेरिकी निर्यात पर रोक: चीन ने अमेरिका से आने वाली गैस (LNG) और कृषि उत्पादों (जैसे सोयाबीन और मक्का) के आयात में कटौती करके अपने ऑर्डर दूसरे देशों में ट्रांसफर कर दिए हैं। इससे अमेरिकी निर्यातकों को लगभग 90 अरब डॉलर के संभावित राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा है।

  • दूसरा दांव - डॉलर का बहिष्कार (De-Dollarization): ब्रिक्स (BRICS) देशों के साथ मिलकर चीन अपनी करेंसी 'युआन' और लोकल पेमेंट्स को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अमेरिकी डॉलर की वैश्विक बादशाहत पर असर पड़ रहा है।

  • तीसरा दांव - 'द 90% मॉडल': चीन ने कई महत्वपूर्ण उद्योगों और सप्लाई चेन पर अपना ऐसा वर्चस्व बना लिया है, जहाँ अमेरिकी कंपनियाँ चाहकर भी चीन का मुकाबला नहीं कर पा रही हैं।"

 "सुपरपावर बनने की इस होड़ में चीन का यह आर्थिक दांव अमेरिका के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल है। सवाल यह उठता है कि क्या वॉशिंगटन इस $90 बिलियन के झटके से उबरने के लिए कोई नया टैरिफ वॉर शुरू करेगा या फिर कूटनीतिक समझौते की राह चुनेगा?

इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताएं। देश और दुनिया की बाकी तमाम बड़ी खबरों के लिए जुड़े रहें हमारे साथ। धन्यवाद!"

भारत के एक फैसले ने अमेरिका की राजनीति में हलचल मचा दी है। विदेशी फंडिंग से जुड़े FCRA कानून को लेकर भारत की सख्ती पर अमेरिका के कुछ सांसदों ने नाराज़गी जताई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे और वीडियो वायरल हो रहे हैं। आखिर पूरा मामला क्या है? क्या सच में भारत के फैसले पर अमेरिकी सांसदों ने धमकी दी है? आइए जानते हैं पूरी खबर।

नमस्कार, आप देख रहे हैं 4S News .

भारत के एक फैसले ने अमेरिका की राजनीति में हलचल मचा दी है। विदेशी फंडिंग से जुड़े FCRA कानून को लेकर भारत की सख्ती पर अमेरिका के कुछ सांसदों ने नाराज़गी जताई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे और वीडियो वायरल हो रहे हैं। आखिर पूरा मामला क्या है? क्या सच में भारत के फैसले पर अमेरिकी सांसदों ने धमकी दी है? आइए जानते हैं पूरी खबर।


दरअसल, हाल के दिनों में Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) के तहत भारत में विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को लेकर चर्चा तेज हुई है। भारत सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए FCRA का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

इसी बीच अमेरिका के कुछ सांसदों ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई। उनका कहना था कि भारत में कुछ संगठनों के लाइसेंस रद्द होने और विदेशी फंडिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों से नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों के काम पर असर पड़ सकता है।

कुछ सांसदों ने यह भी कहा कि अमेरिका को भारत के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए। हालांकि, सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों की पुष्टि नहीं हुई है जिनमें कहा जा रहा है कि अमेरिकी सांसदों ने भारत को "धमकी" दी या किसी बड़े प्रतिबंध की घोषणा कर दी।

भारत सरकार का रुख साफ है। सरकार का कहना है कि FCRA भारत का आंतरिक कानून है और इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का इस्तेमाल कानून के दायरे में और पारदर्शी तरीके से हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक देशों के बीच मानवाधिकार, कानून और नीतियों को लेकर मतभेद होना असामान्य नहीं है। लेकिन ऐसे मामलों में कूटनीतिक बातचीत ही समाधान का रास्ता होती है।

इस बीच सोशल मीडिया पर कई भ्रामक पोस्ट भी वायरल हो रही हैं, जिनमें बढ़ा-चढ़ाकर दावा किया जा रहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते इस मुद्दे पर टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं। फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।


तो फिलहाल इतना तय है कि FCRA को लेकर भारत और अमेरिका के कुछ नेताओं के बीच अलग-अलग राय जरूर सामने आई है, लेकिन वायरल दावों में कही जा रही "धमकी" या किसी बड़े टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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Tuesday, August 4, 2026

Mahakaal (Official Video) B Praak | Jaani | महाकाल | हर हर महादेव | Kripa Re


मेरे तन में भी शिव, मेरे मन में भी शिव | Shiv Naam Kirtan | शिव भजन

मेरे तन में भी शिव, मेरे मन में भी शिव | Shiv Naam Kirtan | शिव भजन

(मुखड़ा)

मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव।
हर धड़कन में बसते हैं,
भोले शंकर शिव॥

(अंतरा 1)

जटा में गंगा, शीश चंद्रमा,
गले विराजे नाग।
डमरू की पावन धुन सुनकर,
मिट जाए हर दाग॥

हर-हर महादेव का नारा,
गूंजे चारों धाम।
जो भी सच्चे मन से बोले,
सँवर जाए उसका काम॥

(कोरस)

ॐ नमः शिवाय... ॐ नमः शिवाय...
हर-हर महादेव... हर-हर महादेव...
मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव॥

(अंतरा 2)

कैलाशपति, करुणा सागर,
सबके पालनहार।
भक्तों के संकट हर लेते,
करते बेड़ा पार॥

भस्म रमाए, त्रिशूल उठाए,
नंदी जिनके साथ।
एक पुकार सुन लेते भोले,
देते सच्चा साथ॥

(कोरस)

मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव।
हर श्वास में बसते हैं,
भोलेनाथ ही शिव॥

(अंतरा 3)

श्रावण मास हो या हो फागुन,
नाम रहे हर बार।
शिव की भक्ति जिसने पाई,
उसका हुआ उद्धार॥

भोले-भोले कहते-कहते,
मन हो जाए शुद्ध।
शिव चरणों में शीश झुकाकर,
मिलता जीवन-बोध॥

(समापन)

मेरे तन में भी शिव,
मेरे मन में भी शिव।
हर जन्म में साथ रहें,
मेरे भोलेनाथ शिव॥

हर-हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय!

भारत ने चीन के निवेश पर बड़ा फैसला लिया है। खबर है कि लंबे समय बाद भारत सरकार ने चीन से जुड़े एक निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी है, लेकिन रकम जानकर आप भी चौंक जाएंगे। यह निवेश सिर्फ 1 करोड़ रुपये का है। क्या भारत ने अपना रुख बदल दिया है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति है? आइए समझते हैं।

China के साथ India का बड़ा खेला! सिर्फ 1 करोड़ रुपये का Chinese निवेश मंजूर, क्या है सरकार का पूरा प्लान?

भारत ने चीन के निवेश पर बड़ा फैसला लिया है। खबर है कि लंबे समय बाद भारत सरकार ने चीन से जुड़े एक निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी है, लेकिन रकम जानकर आप भी चौंक जाएंगे। यह निवेश सिर्फ 1 करोड़ रुपये का है। क्या भारत ने अपना रुख बदल दिया है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति है? आइए समझते हैं।

भारत और चीन के बीच सीमा तनाव के बाद वर्ष 2020 में भारत सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI पर सख्त नियम लागू किए थे। इसके बाद चीन से आने वाले हर निवेश प्रस्ताव को सरकारी मंजूरी के दायरे में लाया गया। इसका उद्देश्य संवेदनशील भारतीय कंपनियों में बिना जांच के निवेश को रोकना था।

अब इसी नीति के तहत चीन से जुड़े एक निवेश प्रस्ताव को मंजूरी मिली है, जिसकी राशि करीब 1 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह रकम बेहद छोटी है, लेकिन इसे इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई वर्षों बाद किसी चीनी निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह मंजूरी मौजूदा FDI स्क्रीनिंग प्रक्रिया के तहत दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने चीन के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं। सरकार अभी भी हर प्रस्ताव की सुरक्षा, रणनीतिक महत्व और आर्थिक प्रभाव के आधार पर अलग-अलग समीक्षा कर रही है। यानी किसी भी निवेश को स्वतः मंजूरी नहीं मिलेगी।

भारत लगातार 'मेक इन इंडिया' और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सरकार पहले की तरह सतर्क रुख बनाए हुए है। ऐसे में यह फैसला बताता है कि भारत की नीति पूरी तरह प्रतिबंध या पूरी तरह छूट की नहीं, बल्कि केस-टू-केस जांच की है।

तो क्या यह भारत-चीन आर्थिक रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत है, या सिर्फ एक सीमित और तकनीकी मंजूरी? इसका जवाब आने वाले समय में अन्य निवेश प्रस्तावों पर सरकार के फैसलों से साफ होगा।

इस फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या भारत को चीन के निवेश पर सख्त रुख बनाए रखना चाहिए या चुनिंदा क्षेत्रों में अनुमति देनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए जुड़े रहिए 4S News के साथ।

सदन में Sonia Gandhi पर भड़के Amit Shah, तीखी नोकझोंक से गरमाया संसद | 4S News संसद में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेते हुए तीखा जवाब दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई, सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कुछ देर के लिए कार्यवाही का माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। आखिर अमित शाह ने क्या कहा और क्यों छिड़ गई इतनी बड़ी राजनीतिक बहस? आइए जानते हैं।

 सदन में Sonia Gandhi पर भड़के Amit Shah, तीखी नोकझोंक से गरमाया संसद | 4S News 

संसद में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेते हुए तीखा जवाब दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई, सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कुछ देर के लिए कार्यवाही का माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। आखिर अमित शाह ने क्या कहा और क्यों छिड़ गई इतनी बड़ी राजनीतिक बहस? आइए जानते हैं।

संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। बहस के दौरान कांग्रेस की ओर से सरकार पर कई सवाल उठाए गए, जिनका जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल और फैसलों का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले दौर पर भी निशाना साधा।

अमित शाह ने कहा कि देश की जनता अब पुरानी राजनीति को पीछे छोड़ चुकी है और सरकार अपने कामकाज के आधार पर जवाब दे रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले लंबे समय तक लंबित रहे, जबकि वर्तमान सरकार ने उन पर निर्णय लेकर उन्हें लागू किया।

अमित शाह के बयान पर कांग्रेस सांसदों ने कड़ा विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने अमित शाह के बयान का समर्थन किया। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के कारण सदन का माहौल काफी देर तक गर्म रहा।

संसद में इस बहस के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज हो गई। भाजपा नेताओं ने अमित शाह के भाषण को सरकार का मजबूत पक्ष बताया, जबकि कांग्रेस ने उनके आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सरकार वास्तविक मुद्दों से बचने की कोशिश कर रही है।

अब इस बहस के बाद राजनीतिक माहौल और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर बयानबाज़ी जारी रह सकती है।

आपकी राय क्या है? क्या संसद में ऐसी तीखी बहस लोकतंत्र का हिस्सा है, या इससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताइए। 4S News के साथ बने रहिए।

POK से सामने आया एक नया वीडियो... जिसने फिर से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह वही इलाका है, जहां लोगों की आवाज़ दबाई जा रही है? क्या भारत जिन आरोपों को वर्षों से उठाता रहा, उन्हें अब स्थानीय लोग भी दोहरा रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल... आखिर संयुक्त राष्ट्र कब तक चुप रहेगा?

POK से सामने आया एक नया वीडियो... जिसने फिर से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह वही इलाका है, जहां लोगों की आवाज़ दबाई जा रही है? क्या भारत जिन आरोपों को वर्षों से उठाता रहा, उन्हें अब स्थानीय लोग भी दोहरा रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल... आखिर संयुक्त राष्ट्र कब तक चुप रहेगा?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी POK से सामने आ रहे वीडियो और गवाहियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज़ हो गई है। हाल के दिनों में वहां विरोध-प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कई राजनीतिक दलों और स्थानीय समूहों ने भी कथित दमन पर चिंता जताई है।

भारत लंबे समय से कहता रहा है कि POK में लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी भारत ने पाकिस्तान पर POK में अधिकारों के दमन का आरोप लगाया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।

 बीच जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं ने भी POK में कथित हिंसा और नागरिकों की मौतों को लेकर भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील की है। वहीं विस्थापित POK निवासियों ने भी विरोध प्रदर्शन कर वहां के लोगों की सुरक्षा और अधिकारों का मुद्दा उठाया है।

अब सवाल यही है—अगर POK से लगातार मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप सामने आ रहे हैं, तो क्या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस पर और सक्रिय होंगी? या फिर यह मुद्दा भी सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा?

 पर आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताइए। ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए जुड़े रहिए 4S News के साथ

Monday, August 3, 2026

Student Protest पर Supreme Court का बड़ा आदेश! छात्रों और अपराधियों पर अलग कार्रवाई | CJP Protest | 4S News देशभर में छात्र प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी प्रदर्शन में शामिल हर छात्र को अपराधी मानना सही नहीं है। यदि किसी ने हिंसा या तोड़फोड़ नहीं की है, तो उसके साथ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

Student Protest पर Supreme Court का बड़ा आदेश! छात्रों और अपराधियों पर अलग कार्रवाई | CJP Protest | 4S News

देशभर में छात्र प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी प्रदर्शन में शामिल हर छात्र को अपराधी मानना सही नहीं है। यदि किसी ने हिंसा या तोड़फोड़ नहीं की है, तो उसके साथ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान के तहत नागरिकों का अधिकार है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति हिंसा, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां और राज्य सरकारें कार्रवाई करते समय यह स्पष्ट अंतर करें कि कौन केवल प्रदर्शन में शामिल था और कौन वास्तव में हिंसक गतिविधियों में शामिल था। बिना पर्याप्त सबूत किसी छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रों का भविष्य और शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी छात्र के खिलाफ हिंसा या अन्य गंभीर अपराध का कोई ठोस सबूत नहीं है, तो केवल प्रदर्शन में मौजूद रहने के आधार पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस टिप्पणी का मतलब यह नहीं है कि हिंसा करने वालों को छूट दी जाएगी। जिन लोगों ने कानून तोड़ा है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है या हिंसा में भाग लिया है, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को छात्र आंदोलनों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का संदेश साफ है—शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए, ताकि निर्दोष छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो।