लैब में तैयार हुआ जिंदा रोबोट | World's First Robot Controlled by Human...

चीन की तियानजिन यूनिवर्सिटी (Tianjin University) और साउथर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने विज्ञान की दुनिया में एक बेहद हैरान कर देने वाला और क्रांतिकारी आविष्कार किया है। उन्होंने दुनिया का पहला ऐसा रोबोट (Brain-on-a-Chip) तैयार किया है, जो किसी कंप्यूटर कोडिंग या पारंपरिक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग की जीवित कोशिकाओं (Human Brain Cells/Organoids) से नियंत्रित होता है [1.1, 1.3]। वैज्ञानिकों के इस अनोखे 'जिंदा रोबोट' से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं: 1. यह कैसे काम करता है? (Brain-on-Chip टेक्नोलॉजी) स्टेम सेल्स से बना 'मिनी-ब्रेन': वैज्ञानिकों ने इंसानी स्टेम सेल्स (Stem Cells) का उपयोग करके प्रयोगशाला (Lab) में दिमाग का एक छोटा हिस्सा विकसित किया, जिसे 'ब्रेन ऑर्गेनॉइड' (Brain Organoid) या मिनी-ब्रेन कहा जाता है [1.1, 1.5]। इलेक्ट्रोड चिप से कनेक्शन: इस जीवित दिमाग के हिस्से को एक इलेक्ट्रॉनिक न्यूरल इंटरफेस चिप (Electrode Chip) से जोड़ा गया है [1.1, 1.5]। यह चिप इंसानी कोशिकाओं के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स (Electrical Signals) को डिकोड करती है और रोबोट के शरीर तक निर्देश पहुंचाती है [1.3, 1.5]। 2. यह रोबोट क्या-क्या कर सकता है? चूँकि इस रोबोट के पास हमारे जैसी आंखें नहीं हैं, इसलिए यह चिप के माध्यम से मिलने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स के आधार पर ही दुनिया को समझता है [1.5]। इस 'जिंदा दिमाग' की मदद से रोबोट निम्नलिखित काम करना सीख गया है: रास्ते की रुकावटों से बचना: चलते समय सामने आने वाले अवरोधों (Obstacles) को पहचान कर रास्ता बदलना [1.1, 1.3]। चीजों को पकड़ना: अपने रोबोटिक हाथों को नियंत्रित कर किसी ऑब्जेक्ट या टारगेट को ट्रैक करना और उसे पकड़ना (Grasping) [1.4, 1.5]। 3. यह पारंपरिक AI से कैसे बेहतर है? शोधकर्ताओं और एक्सपर्ट्स (जैसे कोर्टिकल लैब्स) के अनुसार, इस प्रकार के बायोकंप्यूटर्स (Biocomputers) और हाइब्रिड इंटेलिजेंस पारंपरिक एआई (AI) मशीन लर्निंग चिप्स की तुलना में बहुत तेजी से सीखते हैं और बेहद कम बिजली/ऊर्जा की खपत करते हैं [1.3, 1.4]। 4. भविष्य की राह वैज्ञानिकों ने इस ओपन-सोर्स सिस्टम को 'MetaBOC' नाम दिया है [1.5]। उनका मानना है कि यह तकनीक भविष्य में हाइब्रिड ह्यूमन-रोबोट इंटेलिजेंस (Hybrid Human-Robot Intelligence) के एक नए युग की शुरुआत करेगी [1.3, 1.4]। चिकित्सा के क्षेत्र में इसकी मदद से न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज और डैमेज हुए इंसानी दिमाग के लिए 'लिविंग न्यूरल प्रोस्थेटिक्स' (कृत्रिम न्यूरल अंग) बनाने में बड़ी मदद मिल सकती है [2.5]।