ईरान-अमेरिका तनाव और संभावित परमाणु समझौते को लेकर हाल के दिनों में कई रिपोर्टें सामने आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान वार्ता प्रक्रिया में मध्यस्थ (mediator) और सुरक्षा गारंटर जैसी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि पाकिस्तान को औपचारिक रूप से “न्यूक्लियर डील गारंटर” बना दिया गया है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तथा बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रक्रिया को कई जगह “Islamabad Talks” के नाम से भी बताया गया, जहां परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और Strait of Hormuz जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान चाहता है कि चीन किसी संभावित अमेरिका-ईरान समझौते का गारंटर बने। यानी पाकिस्तान की भूमिका मध्यस्थ की अधिक दिखाई दे रही है, जबकि गारंटी व्यवस्था में चीन का नाम भी सामने आया है। क्या चल रही है बातचीत? अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नियंत्रण और संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) के मुद्दे पर जोर दे रहा है। ईरान प्रतिबंधों में राहत, सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय मुद्दों पर समझौता चाहता है। पाकिस्तान, चीन, कतर और कुछ अन्य क्षेत्रीय देश बातचीत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। क्या डील फाइनल हो गई? नहीं। अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों की ओर से संकेत मिले हैं कि कई मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है। दोनों देशों के बयानों में भी अंतर दिखाई दिया है। संक्षेप में, “ईरान परमाणु समझौते में पाकिस्तान को गारंटर बनाने की तैयारी” वाली खबरें मुख्यतः पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक भूमिका से जुड़ी हैं। फिलहाल किसी आधिकारिक और अंतिम परमाणु समझौते में पाकिस्तान को औपचारिक गारंटर घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वार्ता प्रक्रिया में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है