News Ki Pathshala में इस बार चर्चा का केंद्र बना बंगाल और देशभर में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बढ़ती कार्रवाई। शो में बताया गया कि केंद्र सरकार अब अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने की बड़ी तैयारी में जुटी है। खास तौर पर पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा पार से अवैध तरीके से भारत में घुसने वाले लोगों पर कई राज्यों में जांच तेज कर दी गई है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां ऐसे लोगों के दस्तावेज खंगाल रही हैं, जिन पर फर्जी पहचान पत्र बनवाकर रहने का शक है। शो में दावा किया गया कि कई जगहों पर राशन कार्ड, वोटर आईडी और आधार कार्ड के जरिए पहचान छिपाने की कोशिशें सामने आई हैं। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार का फोकस खास तौर पर उन नेटवर्क्स पर है, जो सीमा पार से लोगों को भारत में बसाने में मदद करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि अवैध घुसपैठ सिर्फ जनसंख्या का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मामला बन चुका है। बंगाल की राजनीति को लेकर भी शो में तीखी बहस दिखाई गई। आरोप लगाया गया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण वर्षों तक इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि असली नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और धर्म के आधार पर कार्रवाई गलत संदेश दे सकती है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर BSF की निगरानी बढ़ाने, दस्तावेज सत्यापन अभियान चलाने और संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए राज्यों के साथ समन्वय की बात भी शो में कही गई। कई जिलों में स्थानीय प्रशासन को किरायेदारों और संदिग्ध दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए जाने का दावा किया गया। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को “अवैध घुसपैठिया” घोषित करने के लिए ठोस दस्तावेजी प्रक्रिया और अदालत की अनुमति जरूरी होती है। ऐसे मामलों में मानवाधिकार और नागरिकता कानून दोनों अहम भूमिका निभाते हैं। पूरा मुद्दा अब सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि राजनीति, पहचान और सीमा प्रबंधन की बड़ी बहस बन चुका है।