“News Ki Pathshala” में जिस “Turkey की धोखेबाजी” की बात की जा रही है, उसका संबंध भारत के सैन्य अभियान Operation Sindoor और उसके दौरान पाकिस्तान को मिले कथित तुर्की समर्थन से जोड़ा जा रहा है। रिपोर्टों और भारतीय मीडिया में यह दावा किया गया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने तुर्की मूल के ड्रोन और कुछ अन्य सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया। बाद में भारत में इसको लेकर काफी राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। आखिर “धोखेबाजी” क्यों कहा जा रहा है? भारत और तुर्की के संबंध पहले कई मौकों पर सहयोगात्मक रहे हैं। 2023 के भूकंप के समय भारत ने Operation Dost के तहत तुर्की को राहत और बचाव सहायता भेजी थी। लेकिन 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव और Operation Sindoor के दौरान तुर्की पर पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने के आरोप लगे। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए ड्रोन तुर्की मूल के थे और तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया। PM Modi और भारत की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई बताया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संदेश कहा। ऑपरेशन के बाद भारत और तुर्की के रिश्तों में तनाव की खबरें भी सामने आईं। कुछ भारतीय संस्थानों और कारोबारी संगठनों ने तुर्की के खिलाफ कदम उठाए, जबकि भारत सरकार ने सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर कुछ तुर्की कंपनियों पर कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर क्या था? Pahalgam attack के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की, जिसे Operation Sindoor नाम दिया गया। भारत ने इसे आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बताया। संक्षेप में, “Turkey की धोखेबाजी” वाली चर्चा इस आरोप पर आधारित है कि जिस तुर्की की मदद भारत ने भूकंप के समय की थी, उसी तुर्की ने बाद में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया। हालांकि इस विषय पर अलग-अलग देशों और स्रोतों के दावे अलग हैं, इसलिए इसे मुख्यतः कूटनीतिक और भू-राजनीतिक विवाद के रूप में देखा जाता है।