भारत-बांग्लादेश सीमा से लगे West Bengal के कई इलाकों में हाल के दिनों में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज़ों के नेटवर्क को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, सीमा पार से आए कुछ लोगों ने स्थानीय एजेंटों की मदद से आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और अन्य पहचान पत्र बनवाए थे, जिनकी अब जांच की जा रही है। विशेष रूप से North 24 Parganas, Basirhat, Bongaon, Malda और सीमा से जुड़े अन्य क्षेत्रों का नाम सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, कई संदिग्ध लोगों ने पूछताछ में बताया कि वे एजेंटों को पैसे देकर सीमा पार आए और बाद में फर्जी भारतीय दस्तावेज़ हासिल किए। क्या है पूरा मामला? पश्चिम बंगाल सरकार ने “Detect, Delete, Deport” अभियान के तहत संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान शुरू की है। राज्य में कई होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं, जहां सत्यापन तक संदिग्ध लोगों को रखा जा रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ नेटवर्क सीमा पार से आए लोगों के लिए फर्जी पहचान पत्र और अन्य कागजात तैयार कर रहे थे। सीमा क्षेत्रों में बीएसएफ और अन्य एजेंसियों की निगरानी बढ़ाई गई है। किन इलाकों का सबसे ज्यादा जिक्र? Basirhat subdivision को लंबे समय से संवेदनशील सीमा क्षेत्र माना जाता रहा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि यहां सीमा के कुछ हिस्सों को अपेक्षाकृत “porous border” माना जाता है, जिसके कारण घुसपैठ और तस्करी की घटनाओं को लेकर समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है। राजनीतिक विवाद भी इस मुद्दे पर Suvendu Adhikari, Amit Shah और अन्य नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष एक-दूसरे पर अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने या इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहे हैं। संक्षेप में, खबर का केंद्र यह है कि भारत-बांग्लादेश सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई चल रही है और अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान तथा सत्यापन का अभियान तेज किया गया है