Tuesday, September 22, 2026

भारत को लेकर इस वक्त दुनिया की नजरें एक बार फिर नई दिल्ली पर टिकी हैं। रूस, चीन और अमेरिका—तीनों के साथ भारत के रिश्तों में एक साथ हो रहे बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

भारत को लेकर इस वक्त दुनिया की नजरें एक बार फिर नई दिल्ली पर टिकी हैं। रूस, चीन और अमेरिका—तीनों के साथ भारत के रिश्तों में एक साथ हो रहे बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

सितंबर 2026 में दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे। इसी दौरान भारत ने Global South की भूमिका को मजबूत करने और BRICS को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के तौर पर नहीं देखने की बात रखी।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़ा नया प्रस्ताव सामने आया। इसमें भारत और चीन जैसे देशों पर भी संभावित कार्रवाई की बात है। भारत ने साफ किया कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित महत्वपूर्ण हैं। रूस और चीन ने भी अमेरिकी कदम पर आपत्ति जताई।

उधर भारत और चीन के बीच भी सितंबर में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग ने सीमा विवाद को बातचीत के जरिए हल करने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

यानी एक तरफ रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी जारी है, दूसरी तरफ चीन के साथ बातचीत का नया दौर चल रहा है और अमेरिका के साथ व्यापार तथा ऊर्जा को लेकर तनाव भी सामने आ रहा है।

इसी वजह से भारत की विदेश नीति को लेकर पूरी दुनिया की नजरें नई दिल्ली पर हैं।

अब बड़ा सवाल यही है—आने वाले समय में भारत इन तीनों बड़ी ताकतों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन किस तरह बनाए रखता है?

भारत की अगली चाल पर अब सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर है।