चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
हाल ही में BRICS Summit के दौरान जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर कई तरह के दावे सोशल मीडिया पर वायरल हुए। एक चीनी असंतुष्ट नेता ने दावा किया कि जिनपिंग को समिट के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया और उन्हें स्ट्रोक आया। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सोशल मीडिया पोस्ट पर भी Community Note लगाया गया था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी BRICS Summit में शामिल विश्व नेताओं की सेहत को लेकर फैल रही कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को भ्रामक बताया था और लोगों को ऐसे दावों से सावधान रहने को कहा था।
गौर करने वाली बात ये भी है कि जिनपिंग ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाने और मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने पर जोर दिया था।
इसके बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की भी पुष्टि की है। वह 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं।
यानी जिनपिंग की सेहत को लेकर वायरल दावों और आधिकारिक जानकारी के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।
ऐसे में “भारत जिनपिंग की मदद करेगा” जैसी बात को फिलहाल पुष्ट खबर नहीं, बल्कि वायरल दावे के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
भारत और चीन के रिश्तों में हाल के दिनों में संवाद बढ़ा है, लेकिन जिनपिंग की कथित बीमारी के इलाज में भारत की किसी विशेष मदद की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।
अब बड़ा सवाल यही है—जिनपिंग की सेहत को लेकर वायरल दावों की सच्चाई क्या है औ