भारत को लेकर दुनिया में एक बार फिर बड़ी चर्चा छिड़ी हुई है। सवाल ये है कि क्या दुनिया के गरीब और विकासशील देशों के बीच बन रही नई आर्थिक रणनीति भारत के लिए कोई नई चुनौती पैदा कर सकती है?
हाल ही में BRICS देशों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। साथ ही, एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई गई है।
यानी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था में बदलाव की कोशिश तेज हो रही है और भारत भी इस पूरी बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया दावों में इसे भारत के खिलाफ किसी बड़े “फार्मूले” के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया है कि किसी गरीब देश ने भारत को निशाना बनाने के लिए कोई गुप्त योजना तैयार की है।
असल मुद्दा आर्थिक ताकत और वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व का है। BRICS ने IMF और World Bank में विकासशील देशों की आवाज बढ़ाने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत अपनी भूमिका को किस तरह मजबूत करता है।
क्या आने वाले समय में विकासशील देशों की नई आर्थिक साझेदारियां दुनिया की पुरानी व्यवस्था को चुनौती देंगी? और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा से काफी हद तक स्पष्ट होंगे।