Friday, September 25, 2026

₹84,000 करोड़ का 'समुद्र मंथन', 150 नए तेल के कुएं खोद रहा India! भारत अब जमीन के नीचे ही नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी ऊर्जा के नए भंडार तलाशने जा रहा है। इसके लिए शुरू हुआ है भारत का बड़ा 'समुद्र मंथन' अभियान।

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₹84,000 करोड़ का 'समुद्र मंथन', 150 नए तेल के कुएं खोद रहा India!

भारत अब जमीन के नीचे ही नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी ऊर्जा के नए भंडार तलाशने जा रहा है। इसके लिए शुरू हुआ है भारत का बड़ा 'समुद्र मंथन' अभियान।

इस पूरे मिशन का पैमाना सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

भारत सरकार ने समुद्र के अंदर तेल और गैस की खोज को तेज करने के लिए करीब ₹84,084 करोड़ के Samudra Manthan कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इस योजना का मकसद भारत के offshore यानी समुद्री इलाकों में मौजूद तेल और गैस के संभावित भंडार को खोजकर उन्हें उत्पादन में लाना है।

लेकिन कहानी सिर्फ 84 हजार करोड़ की नहीं है।

ONGC के मुताबिक, इस अभियान के तहत करीब 150 deepwater wells यानी समुद्र की गहराई में नए खोजी कुएं खोदने की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके साथ करीब 5,600 MMTOE deepwater और ultra-deepwater hydrocarbon potential को तलाशने का लक्ष्य रखा गया है।

अब सवाल है कि भारत को समुद्र में इतना बड़ा अभियान चलाने की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों में शामिल है और अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत तक आयात करता है। वहीं घरेलू तेल उत्पादन लंबे समय से दबाव में है। ऐसे में समुद्र के अंदर मौजूद संभावित नए भंडार भारत की energy security के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इस मिशन में सिर्फ कुएं खोदना ही नहीं है।

पहले आधुनिक seismic surveys के जरिए समुद्र के नीचे मौजूद चट्टानों और geological structures की तस्वीर तैयार की जाएगी। इसके बाद संभावित क्षेत्रों में exploration wells ड्रिल किए जाएंगे।

और यहां सबसे बड़ा जोखिम भी है।

समुद्र में तेल की खोज का मतलब यह नहीं कि हर कुएं से तेल जरूर निकलेगा। Offshore exploration में कई कुएं commercial discovery तक नहीं पहुंचते। इसलिए सरकार ने exploration के जोखिम को कम करने के लिए आर्थिक सहायता का भी प्रावधान किया है।

जुलाई 2026 में ओडिशा के तट के पास Mahanadi Offshore Basin में ONGC ने deepwater exploration well की drilling शुरू करके इस अभियान में एक अहम कदम उठाया। यह क्षेत्र Utkal और Konark discoveries से जुड़ी संभावनाओं के कारण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगर आने वाले वर्षों में इन समुद्री क्षेत्रों में बड़े और commercially viable तेल-गैस भंडार मिलते हैं, तो भारत की घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन याद रखिए—150 कुओं का मतलब 150 तेल के भंडार मिलना नहीं है। ये exploration wells हैं, जिनका असली परिणाम drilling और geological evaluation के बाद ही सामने आएगा।

यानी भारत का यह 'समुद्र मंथन' असल में समुद्र से तेल निकालने से पहले समुद्र के नीचे छिपी ऊर्जा की तलाश का बड़ा अभियान है।

अब आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा सवाल यही होगा—समुद्र की इन गहराइयों में भारत को कितना तेल और गैस मिलता है?

अगर खोज सफल होती है, तो इसका असर सिर्फ energy sector पर नहीं, बल्कि भारत की long-term energy security पर भी पड़ सकता है।

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