UN के मंच से Nepal PM ने India को बोला Thank You!
नमस्कार, आप देख रहे हैं 4S News।
संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA के मंच से नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत का जिक्र किया तो पूरे दक्षिण एशिया की निगाहें उनकी तरफ टिक गईं।
24 सितंबर 2026 को UNGA के 81वें सत्र में अपने पहले संबोधन में नेपाल के प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अपने देश में आई भीषण बाढ़ और तबाही का मुद्दा उठाया।
अगस्त में आई Bhotekoshi-Trishuli आपदा में नेपाल को भारी नुकसान हुआ। प्रधानमंत्री शाह के मुताबिक, इस त्रासदी में कम से कम 1,400 लोगों की मौत हुई और 6,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
लेकिन इसके बाद उन्होंने उन देशों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने मुश्किल वक्त में नेपाल की मदद की।
और यहां भारत का नाम खास तौर पर सामने आया।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन ने आपदा के बाद तत्काल और उदार सहायता उपलब्ध कराई।
उन्होंने UN के मंच से नेपाल की जनता की ओर से मदद करने वाले देशों और संगठनों के प्रति आभार जताया।
यानी जिस वक्त दुनिया के सामने नेपाल अपनी त्रासदी की कहानी बता रहा था, उसी मंच से भारत की मदद का भी सार्वजनिक रूप से उल्लेख हुआ।
लेकिन बालेंद्र शाह का भाषण सिर्फ धन्यवाद तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन सीमाओं को नहीं पहचानता। उनका तर्क था कि हिमालय में आने वाली बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़े खतरे नेपाल, भारत और चीन—तीनों देशों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसीलिए उन्होंने नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में एक Himalayan Climate Resilience Mechanism बनाने का प्रस्ताव रखा।
इसमें सैटेलाइट डेटा साझा करना, खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली मजबूत करना और सीमा-पार आपदा प्रतिक्रिया को बेहतर बनाना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
प्रधानमंत्री शाह ने दुनिया की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया बना दी गई है जहां युद्ध के लिए हथियार और गोला-बारूद तेजी से पहुंच जाते हैं, लेकिन गरीब देशों के किसानों तक खाद और ईंधन समय पर नहीं पहुंचता।
उन्होंने इसे वैश्विक व्यवस्था की एक बड़ी विडंबना के तौर पर पेश किया।
और इसी दौरान उन्होंने भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के देश ऐसे जलवायु संकटों का सामना कर रहे हैं, जिन्हें उन्होंने पैदा नहीं किया।
यानी नेपाल के UNGA भाषण में भारत के लिए एक तरफ आभार, तो दूसरी तरफ भविष्य के लिए क्षेत्रीय सहयोग का प्रस्ताव सामने आया।
अब देखना होगा कि नेपाल, भारत और चीन के बीच प्रस्तावित हिमालयी जलवायु सहयोग जमीन पर कितना आगे बढ़ता है।
क्योंकि हिमालय की नदियां, ग्लेशियर और बाढ़ किसी सीमा को नहीं मानते—और यही संदेश नेपाल के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से दुनिया को दिया।
ads