Israel-UAE Massive Action On Iran LIVE: UAE में इजरायल के धमाके से टूटा इस्लामिक NATO!
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते टकराव के बीच अब यूएई की भूमिका भी चर्चा में है।
हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूएई की यात्रा की और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से करीब छह घंटे की मुलाकात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में द्विपक्षीय रिश्तों के साथ-साथ ईरान से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे भी शामिल थे।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है—क्या यूएई और इजरायल की नजदीकी उस कथित "इस्लामिक NATO" के समीकरण को बदल रही है?
दरअसल, अगस्त 2026 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच एक संयुक्त रक्षा समझौते की चर्चा हुई, जिसे कुछ विश्लेषकों ने "Islamic NATO" जैसे नाम से वर्णित किया। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि इसे NATO के समान पूर्ण सैन्य गठबंधन मानना अभी जल्दबाजी होगी।
दूसरी तरफ ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। अगस्त में यूएई ने ईरान से आए एक ड्रोन हमले की निंदा की थी और इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ गंभीर कार्रवाई बताया था।
इसी बीच मई की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि ईरान के खिलाफ कुछ यूएई कार्रवाइयों में इजरायल के साथ समन्वय हुआ था। हालांकि यूएई ने इन रिपोर्टों की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की थी।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहा यह दावा कि "इजरायल के धमाके से इस्लामिक NATO टूट गया", अभी एक स्थापित तथ्य नहीं बल्कि एक राजनीतिक/मीडिया नैरेटिव के रूप में देखा जाना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अलग-अलग देशों के ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ संबंध एक जैसे नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कोई भी सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र के सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
और अब सबसे बड़ा सवाल—क्या मिडिल ईस्ट में दो अलग-अलग सुरक्षा ध्रुव बन रहे हैं? एक तरफ इजरायल और उसके क्षेत्रीय साझेदार, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ जुड़े संगठन और उसके समर्थक?
जैसे-जैसे घटनाक्रम सामने आएगा, दुनिया की नजर अब ईरान, यूएई, इजरायल और सऊदी अरब की अगली चाल पर रहेगी।