Tuesday, September 29, 2026

भारत अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आसमान में अपनी ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं है… बल्कि युद्ध के उस क्षेत्र पर भी तेजी से फोकस कर रहा है, जहां आने वाले समय की सबसे बड़ी रणनीतिक लड़ाई लड़ी जा सकती है—और वो है अंतरिक्ष यानी Space Domain।

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भारत अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आसमान में अपनी ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं है… बल्कि युद्ध के उस क्षेत्र पर भी तेजी से फोकस कर रहा है, जहां आने वाले समय की सबसे बड़ी रणनीतिक लड़ाई लड़ी जा सकती है—और वो है अंतरिक्ष यानी Space Domain।

आज दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां समझ चुकी हैं कि भविष्य की जंग सिर्फ टैंक, मिसाइल और फाइटर जेट से नहीं होगी। जिस देश के पास बेहतर Satellite Communication, Navigation, Intelligence, Surveillance और Space Situational Awareness होगी, उसे युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

और इसी बदलते युद्धक्षेत्र को देखते हुए भारत भी अपनी तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

हालांकि यहां एक जरूरी बात साफ कर दें—भारत में अलग से “India Space Command” नाम की कमान स्थापित होने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सरकारी स्रोतों में नहीं है। लेकिन भारतीय रक्षा व्यवस्था में Space को एक महत्वपूर्ण operational domain के रूप में विकसित किया जा रहा है।

भारत की सैन्य रणनीति अब Land, Sea और Air के साथ Space और Cyber Domain को भी जोड़कर देख रही है।

2026 में आयोजित ‘Ran Samwad’ जैसे रणनीतिक सैन्य कार्यक्रमों में Multi-Domain Operations पर जोर दिया गया, जिसमें Land, Sea, Air के साथ Space, Cyber और Cognitive domains को भी शामिल किया गया।

यानी आने वाले समय में अगर किसी देश की Satellite Communication व्यवस्था बाधित होती है, Navigation System को निशाना बनाया जाता है या किसी दुश्मन की गतिविधियों पर Space से नजर रखनी हो, तो इन सभी क्षमताओं का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।

भारत की सबसे बड़ी ताकत—Space Awareness

भारत ने Space में अपनी स्थिति को समझने और अपने Space Assets की सुरक्षा बढ़ाने के लिए Indian Space Situational Awareness Report यानी ISSAR जैसी व्यवस्था विकसित की है।

ISRO के मुताबिक IS4OM यानी Indian Space Situational Awareness framework देश के Space Assets को अंतरिक्ष में मौजूद अलग-अलग खतरों से सुरक्षित रखने और Space Environment की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसका मतलब है कि भारत सिर्फ Satellite लॉन्च करने पर ही ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि यह भी देख रहा है कि अंतरिक्ष में उसके Satellites के आसपास क्या हो रहा है।

कौन सा object किस trajectory पर है?

किसी Satellite के करीब कोई दूसरा object तो नहीं पहुंच रहा?

Space debris से खतरा कितना है?

और भारतीय Space Assets को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

ये सभी सवाल अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं।

ISRO की उपलब्धियां भी बढ़ा रही हैं भारत की Space Power

भारत की Space capability का आधार सिर्फ Defence नहीं, बल्कि ISRO की लगातार बढ़ती तकनीकी क्षमता भी है।

2025 में SpaDeX Mission के जरिए भारत ने Space में autonomous docking और undocking का सफल प्रदर्शन किया। इसके साथ भारत Space docking capability प्रदर्शित करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।

यह तकनीक भविष्य में Space Station, in-orbit servicing और दूसरे advanced Space operations के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

यानी आज भारत Satellite launch करने वाले देश से आगे बढ़कर ऐसी तकनीकों की तरफ जा रहा है जो भविष्य के जटिल Space missions के लिए जरूरी होंगी।

Defence में Space क्यों जरूरी है?

मान लीजिए किसी युद्ध के दौरान जमीन पर मौजूद सैनिकों को तुरंत Communication चाहिए।

Missile को accurate Navigation चाहिए।

किसी इलाके की लगातार निगरानी करनी है।

दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी चाहिए।

या फिर किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान जमीन की तस्वीरें तुरंत चाहिए।

इन सभी क्षेत्रों में Space-based systems की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

यही वजह है कि भारत की defence planning में Space को अब एक अलग strategic domain के तौर पर ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने भी 2026 में कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल traditional battlefield तक सीमित नहीं है और Space तथा Cyber Space नए conflict domains के रूप में उभर रहे हैं।

भारत का लक्ष्य सिर्फ ताकत दिखाना नहीं

भारत की Space policy का एक बड़ा हिस्सा civilian और scientific applications से भी जुड़ा हुआ है।

Communication, weather forecasting, agriculture, disaster management, navigation, mapping और scientific research—इन सभी क्षेत्रों में Space technology का इस्तेमाल होता है।

2026 में सरकार ने बताया कि जुलाई 2023 से जून 2026 के बीच भारत ने 12 launch vehicle missions, 11 national satellites और international customers के लिए 9 satellites लॉन्च किए। इसी अवधि में भारत ने Sriharikota से 100 launches का milestone भी हासिल किया।

इसके अलावा भारत का Space ecosystem अब सिर्फ सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है।

सरकार के अनुसार फरवरी 2026 तक भारत में Space startups की संख्या 400 से अधिक हो चुकी थी।

यानी आने वाले समय में Space technology में private companies और startups की भूमिका भी बढ़ने वाली है।

असली मुकाबला Technology का है

आज Space Power का मतलब सिर्फ ज्यादा Satellites होना नहीं है।

असल मुकाबला है—

किसके Satellites ज्यादा सुरक्षित हैं?

किसके Sensors ज्यादा accurate हैं?

किसके पास बेहतर Communication network है?

किसके पास Space Objects को Track करने की क्षमता है?

और कौन तेजी से नई Space technology विकसित कर सकता है?

यही कारण है कि भारत AI, Cyber, Quantum Technology और Space capabilities को भविष्य की national security architecture का हिस्सा मानकर आगे बढ़ रहा है।

आने वाला समय Space Security का है

दुनिया तेजी से बदल रही है और अब Space सिर्फ वैज्ञानिक खोज का क्षेत्र नहीं रह गया है।

यह Communication का infrastructure है।

यह Navigation का आधार है।

यह Intelligence और Surveillance में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

और इसी वजह से Space Security आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बनने जा रही है।

भारत भी इसी बदलती तस्वीर को देखते हुए अपनी Space Situational Awareness, satellite capabilities, launch technology और multi-domain military preparedness को मजबूत कर रहा है।

इसलिए “India Space Command” को लेकर वायरल दावों को अलग रखते हुए असली खबर यह है कि भारत की Space और Defence capabilities लगातार एक नए strategic phase में प्रवेश कर रही हैं।

आने वाले समय में जिस देश के पास Space में मजबूत infrastructure, सुरक्षित satellites, बेहतर tracking systems और advanced technology होगी, उसकी strategic capabilities भी उतनी ही महत्वपूर्ण होंगी।

और भारत की तैयारी अब साफ तौर पर इसी भविष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।

आपको क्या लगता है—क्या भविष्य की सबसे बड़ी जंग जमीन पर होगी या Space और Cyber जैसे नए domains में?

कमेंट करके अपनी राय जरूर बताइए।

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